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जमहूरीयत हिंदूस्तान की तरक़्क़ी की राह में हाय्ल: महातर मुहम्मद

नई दिल्ली, ०३ दिसम्बर: (पी टी आई) मलॆशिया-ए-के साबिक़ वज़ीर-ए-आज़म महातर मुहम्मद ने कहा कि हिंदूस्तान तरक़्क़ी के मुआमले में चीन से भी ज़्यादा तरक़्क़ी करसकता था अगर इस के पास जमहूरीयत का अमल कम होता।

नई दिल्ली, ०३ दिसम्बर: (पी टी आई) मलॆशिया-ए-के साबिक़ वज़ीर-ए-आज़म महातर मुहम्मद ने कहा कि हिंदूस्तान तरक़्क़ी के मुआमले में चीन से भी ज़्यादा तरक़्क़ी करसकता था अगर इस के पास जमहूरीयत का अमल कम होता।

महातर मुहम्मद जिन्हों ने मलाईशया-ए-पर 22 साल तक तवील हुक्मरानी की है कहा कि अगर चक्का जमहूरीयत हुकूमत की एक बेहतरीन शक्ल ही, इस पर चल कर हुक्मरानी के फ़राइज़ अंजाम देना आसान नहीं है। यहां हिंदूस्तान टाईम्स लीडरशिप चोटी कान्फ़्रैंस से ख़िताब करते हुए उन्होंने कहा कि अगर हिंदूस्तान जमहूरी मुलक ना होता तो वो तरक़्क़ी के मुआमले में चीन की तरह होता।

उन्हों ने दावे किया कि सिंगापुर ने भी अपने महिदूद जमहूरी अमल के बाइस मआशी शोबा में ज़बरदस्त छलांग लगाई ही। इस लिए बाअज़ औक़ात जमहूरीयत से पार्लीमैंट मफ़लूज हो सकती है। हम ममालिक को जमहूरीयत क़बूल करने के लिए मजबूर नहीं करसकती। अगर चक्का जमहूरी अमल हुक्मरानी की बेहतरीन शक्ल है।

जमहूरीयत की वजह से हिंदूस्तान की मआशी तरक़्क़ी में सुस्त रफ़्तारी के मुताल्लिक़ उन के ये रिमार्कस ऐसे वक़्त सामने आए जब हिंदुस्तान में मल्टी ब्रांड रीटेल शोबा में बैरूनी रास्त सरमाया कारी की इजाज़त देने मर्कज़ी हुकूमत के फ़ैसला पर पार्लीमैंट में तात्तुल पैदा हुआ है।

महातर मुहम्मद ने कहा कि जमहूरीयत हमेशा इस्तिहकाम और तरक़्क़ी को यक़ीनी नहीं बनाती। ताहम जमहूरी तो रपर हुकूमत करना आसान होता है क्यों कि अवाम जमहूरीयत के हदूद को नहीं समझते लेकिन मुमलिकती वज़ीर कॉमर्स और सनअत जो तीव्र दतिया संध्या और बी जे डी रुकन पार्लीमैंट जुए पांड्या ने महातर मुहम्मद के इस इस्तिदलाल को मुस्तर्द करदिया और कहा कि हिंदूस्तान ने तरक़्क़ी के मुआमला में ज़बरदस्त सबक़त हासिल की है।

पांड्या ने कहा कि हिंदूस्तानी जमहूरी निज़ाम फ़रोग़ पा रहा है। दुनिया में ऐसे कई ममालिक हैं जहां जमहूरीयत नहीं है वहां तरक़्क़ी भी मफ़क़ूद है। जहां तक जमहूरीयत की वजह से हिंदूस्तान की तरक़्क़ी में रुकावट का सवाल हैं, बिलाशुबा ये एक मुश्किल तरीन मसला है। हमारा निज़ाम फ़रोग़ पा रहा है। हमारी पैदावारी-ओ-तरक़्क़ी की सलाहीयतें माज़ी के दहों के मुक़ाबला में बेहतर हैं। हमें अपने निज़ाम पर काम करने की ज़रूरत है।

हमें अपने सिस्टम को तबदील करने की ज़रूरत नहीं। महातर मुहम्मद ने कहा कि अगर चीका हिंदूस्तान एक तवील मुद्दत से जमहूरीयत को सीने से लगाए आगे बढ़ रहा है लेकिन इस के समाजी मैदान उस की तरक़्क़ी की राह में हाइल हैं।

उन्हों ने एक मज़बूत मर्कज़ी हुकूमत और कमतर इख़्तयारात की हाइल वफ़ाई हुकूमतों की तजवीज़ रखी। इस तरह के रवैय्या से तरक़्क़ी को आगे ले जाने में मदद मिलेगी। महातर मुहम्मद ने कहा कि आप को एक मज़बूत ताक़तवर मर्कज़ी हुकूमत और कम इख़्तयारात की हामिल सुबाई हुकूमतों की ज़रूरत है क्यों कि मर्कज़ और सूबों के दरमयान कोई मुआहिदा नहीं होगा।

इस से किसी पालिसी को फ़रोग़ देने में हुकूमत के लिए मुश्किलात दरपेश होंगी।इराक़ और लीबिया में हालिया हमा क़ौमी फ़ौजी कार्यवाईयों का हवाला देते हुए मलाईशया-ए-के क़ाइद ने कहा कि जब अवाम का क़तल-ए-आम किया जाता है तो वो जमहूरीयत के फ़वाइद से मुस्तफ़ीद नहीं होसकती। महातर मुहम्मद ने कहा कि मौजूदा मालीयाती बोहरान जमहूरी निज़ाम को तहस-ओ-नहस करने का नतीजा है। उसे मज़बूत बनाने की ज़रूरत है।

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