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जमानत के लिए पैसे नहीं थे , बिताने पडे़ 19 साल जेल में

नई दिल्ली, 1 जून: हिंदुस्तानी अदालती निज़ाम (Indian Judicial System) के लिए यह एक बड़ा सवाल है? एक खातून को जेल में 19 साल सिर्फ इसलिये गुजारने पड़े, क्योंकि उसके पास जमानत लेने के लिये 5000 रुपये नहीं थे।

नई दिल्ली, 1 जून: हिंदुस्तानी अदालती निज़ाम (Indian Judicial System) के लिए यह एक बड़ा सवाल है? एक खातून को जेल में 19 साल सिर्फ इसलिये गुजारने पड़े, क्योंकि उसके पास जमानत लेने के लिये 5000 रुपये नहीं थे।

यह खातून 5000 रुपये न होने की वजह से 19 साल जेल में सड़ती रही। जेल में ही उसने अपने बेटे को जन्म दिया, और इसी बेटे ने 19 साल बाद पैसे जुटाकर अपनी मां की जमानत कराई। आज वह मां जेल की काल कोठरी से बाहर है, लेकिन इस वाकिया ने हमारे मआशरा और निज़ाम को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

इस खातून का नाम विजय कुमारी है। इसने 19 साल सलाखों के पीछे काटे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बच्चे के आंसू देखकर न सिर्फ 5000 रुपये की माफी दी बल्कि उत्तर प्रदेश हुकूमत से एक महीने के अंदरून ऐसे कैदियों का ब्यौरा मांगा है, जो जमानत के बावजूद जेल में बंद हैं सिर्फ इसलिये क्योंकि उसके पास या तो पैसे नहीं हैं या उनके अपनों ने उन्हें जेल में सड़ने के लिए छोड़ दिया है। विजय कुमारी की जिंदगी में दो मकसद हैं, एक खुद पर बच्चे के कत्ल का मुकदमा लड़ना और बेटे को अपने बाप का हक दिलाना।

सच बात तो यह है कि जेल जाने के एक साल बाद ही उसकी जमानत हो गई थी, लेकिन जिस शौहर को जमानत के 5000 रुपये बतौर मुचलका अदा करनी थी वो लौट कर आया ही नहीं, ससुराल वालों ने भी कोई खबर नहीं ली। यह वाकिया 1993 की है। गौरतलब है कि अलीगढ़ में अपने ससुराल में रह रही विजय कुमारी पर एक बच्चे के कत्ल का मुकदमा दर्ज हुआ, ससुराल वालों की रंजिश पड़ोसियों से थी और इसी रंजिश के दौरान ही तालाब में एक बच्चे की लाश मिलने पर कत्ल का इल्ज़ाम विजय कुमारी पर आ गया, निचली अदालत ने उसे उम्र कैद की सजा सुनाई, साल भर बाद 1994 में उसे जमानत मिल गई, लेकिन जमानत के 5000 का इंतेजाम होता तब तक जेल में गुजर गए 19 साल।

——-बशुक्रिया: जागरण

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