जमीन हमारी, जद्दो-जहद हमारा, संगे बुनियाद सोनियाजी करेंगी!

जमीन हमारी, जद्दो-जहद हमारा, संगे बुनियाद सोनियाजी करेंगी!
किशनगंज में अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के कैंपस के संगे बुनियाद तकरीब को लेकर मर्कज़ और रियासती हुकूमत के दरमियान तनाज़ा पैदा हो गया है। रियासती हुकूमत ने उसे बिना जानकारी दिये 30 जनवरी को इसका संगे बुनियाद तकरीब तय करने को र

किशनगंज में अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के कैंपस के संगे बुनियाद तकरीब को लेकर मर्कज़ और रियासती हुकूमत के दरमियान तनाज़ा पैदा हो गया है। रियासती हुकूमत ने उसे बिना जानकारी दिये 30 जनवरी को इसका संगे बुनियाद तकरीब तय करने को रियासती निज़ाम पर चोट करार दिया है।

तालीम वज़ीर पीके शाही ने मर्कज़ी इंसानी वसायल तरक़्क़ी वज़ीर एमएम पल्लम राजू को पीर को खत लिख कर इस सिलसिले में नाराजगी जतायी। इसके संगे बुनियाद के लिए 30 जनवरी को कांग्रेस सदर सोनिया गांधी किशनगंज पहुंच रही हैं।

खत में तालीम वज़ीर ने कहा है कि एएमयू के कैंपस के लिए रियासती हुकूमत ने मुफ्त में 224 एकड़ जमीन दस्तयाब करायी है। लेकिन, सियासी वजूहात से और इंतिखाबी फायदा लेने के लिए मर्कज़ी हुकूमत ने बिहार हुकूमत को इसके संगे बुनियाद तकरीब और इसमें सोनिया गांधी के शामिल होने की जानकारी देना जरूरी नहीं समझा है। पूरे तकरीब से बिहार हुकूमत को अलग और अंधेरे में रखा गया है। शाही ने नाराजगी भरे लहजे में कहा है कि इस तकरीब को सियास तकरीब और इंतिखाबी मंसूबा में नहीं बदलना चाहिए। एएमयू मर्कज़ी यूनिवर्सिटी है और इसका कोई भी तकरीब सरकारी होता है। ऐसे में रियासती हुकूमत को इसकी इत्तिला देनी चाहिए। लेकिन, इसके संगे बुनियाद तकरीब की इत्तिला रियासती हुकूमत को अखबारों से मिली, जबकि इस तकरीब में मर्कज़ी इंसानी वसायल तरक़्क़ी वज़ीर और अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी के चांसलर ने रियासत के गोवर्नर डीवाइ पाटील को मदउ किया है।

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