Saturday , December 16 2017

जम्मू-ओ-कश्मीर हिंदुस्तान का अटूट हिस्सा : उमर‌ अबदुल्लाह

वज़ीर-ए-आला जम्मू-ओ-कश्मीर उमर‌ अबदुल्लाह ने आज इन इल्ज़ामात की तरदीद की कि जम्मू-ओ-कश्मीर रियासत के हिंदुस्तान से अल-हाक़ से मुताल्लिक़ उन्होंने मशरूत और ना मुकम्मल जैसे अल्फ़ाज़ इस्तिमाल किए।

वज़ीर-ए-आला जम्मू-ओ-कश्मीर उमर‌ अबदुल्लाह ने आज इन इल्ज़ामात की तरदीद की कि जम्मू-ओ-कश्मीर रियासत के हिंदुस्तान से अल-हाक़ से मुताल्लिक़ उन्होंने मशरूत और ना मुकम्मल जैसे अल्फ़ाज़ इस्तिमाल किए।

उन्होंने वज़ाहत की जम्मू-ओ-कश्मीर हिंदुस्तान का एक अटूट हिस्सा है। दरबार मुंतक़ली के मौक़ा पर अख़बारी नुमाइंदों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब जम्मू-ओ-कश्मीर ने हिंदुस्तान से अल-हाक़ करलिया है तो फिर क्या ये हिंदुस्तान का अटूट हिस्सा नहीं हुआ?

लिहाज़ा मुझे ज़बान देने की कोशिश ना करें मैंने कभी भी मशरूत और ना मुकम्मल जैसे अल्फ़ाज़ का इस्तिमाल नहीं किया। अपनी बात जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि, अगर आप चाहें तो एसेंबली का रिकार्ड भी चैक करसकते हैं। योरोपी यूनियन ममालिक के साथ‌ एक वफ़द से तबादला-ए-ख़्याल करते हुए उन्होंने कहा था कि हिंदुस्तान से अल-हाक़ के बाद यहां दीगर रियासतें हिंदुस्तान में ज़म होगईं वहीं जम्मू-ओ-कश्मीर ने करंसी, मुवासलात, अमूर ख़ार्जा और दिफ़ा की चार बुनियादों पर हिंदुस्तान से अल-हाक़ किया था।

ये पूछे जाने पर कि क्या इंतिख़ाबात के बाद वो यू पी ए से अपनी मुफ़ाहमत जारी रखेंगे या तीसरे महाज़ में हलीफ़ जमात के तौर पर शामिल होजाएंगे, जिस का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि तीसरे महाज़ का हिस्सा होने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

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