जम्मू और कश्मीर कठुआ अपराध से हुआ विभाजित

जम्मू और कश्मीर कठुआ अपराध से हुआ विभाजित
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जम्मू : एक आठ साल की लड़की को बेहोश की जाती है और एक प्रार्थना कक्ष में एक गिरोह के साथ बलात्कार किया जाता है और उसके बाद मौत की सजा दी जाती है। जम्मू-कश्मीर में आठ साल की एक बच्ची के साथ कथित बलात्कार और हत्या के मामले की आधिकारिक जांच में यह सामने आया है कि रेप और हत्या से पहले उसे एक मंदिर में बंधक बना कर रखा गया था. एक नए डीएनए टेस्ट में यह बात सामने आई है. कठुआ मामले को लेकर पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट में कई चौकाने वाले खुलासे हुए हैं. पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि गांव के एक मंदिर में आठ साल की बच्ची के साथ बारी-बारी से छह लोगों ने रेप किया. पुलिस के अनुसार आरोपियों ने बच्ची की हत्या करने से ठीक पहले भी उसके साथ दोबारा रेप किया था. पुलिस ने कोर्ट को बताया कि छह आरोपियों में से एक आरोपी को सिर्फ रेप करने के लिए ही मेरठ से जम्मू बुलाया गया था.

इस जांच रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के कठुआ ज़िले के एक मंदिर में बाल की कुछ लटें मिली हैं, जो मृतक के बालों से मेल खाती हैं. यहां की हिंदू और मुस्लिम आबादी के विरोध के बीच राज्य क्राइम ब्रांच पिछले तीन महीनों से इस मामले की जांच कर रही थी. नाबालिग आसिफ़ा यूसुफ 10 जनवरी से ही गुम थीं. वो अपने आदिवासी गांव रसना के पास ही जंगल में अपने परिवार के खच्चरों को चराने गई थीं और फिर कभी घर नहीं लौटीं. 17 जनवरी को उनका शव मिला, जिसपर चोट के निशान थे. इसके बाद से ही इलाके में राजनीतिक उथल पुथल मची हुई है.

जांच एजेंसी ने अब तक इस मामले में मास्टरमाइंड संजी राम और उनके बेटे विशाल कुमार समेत नौ अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है. इसमें एक पुलिस हेड कॉन्स्टेबल, दो एसपीओ और एक सब-इंस्पेक्टर भी शामिल हैं. जांच से पता चला है कि यह कोई बिना सोचे समझे किया गया अपराध नहीं था, बल्कि बकरवाल समुदाय के लोगों को वहां से हटाने की मंशा से इस सुनियोजित हत्या को अंजाम दिया गया.

एसआईटी ने पिछले हफ़्ते हाई कोर्ट के सामने स्टेटस रिपोर्ट में बताया, “इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड ने इलाके से बकरवाल समुदाय को हटाने के उद्देश्य से अन्य लोगों के साथ मिलकर इस जघन्य अपराध की साज़िश को डिजाइन किया.” जांच और इसके बाद की गई गिरफ़्तारी से कठुआ के हिंदुओं ने भाजपा समेत कुछ राजनीतिक पार्टियों के समर्थन से एक बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू किया. विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व एक नए समूह हिंदू एकता मंच ने किया, जिससे इस इलाके में सांप्रदायिक तनाव का भय पैदा हो गया.

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