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जयपुर अदबी मेला पर रुशदी का मनहूस साया बरक़रार

जयपुर, २२ जनवरी (पी टी आई) अदबी बिरादरी अगरचे मुतनाज़ा मुसन्निफ़ सलमान रुशदी को दौरा हिंद की मंसूख़ी के लिए मजबूर करने वाले किसी भी इक़दाम की मुख़ालिफ़ ज़रूर थी, लेकिन ऐसा महसूस होता है कि इस के दौरा की मंसूख़ी के ख़िलाफ़ बतौर-ए‍एहतेजाज ममनू

जयपुर, २२ जनवरी (पी टी आई) अदबी बिरादरी अगरचे मुतनाज़ा मुसन्निफ़ सलमान रुशदी को दौरा हिंद की मंसूख़ी के लिए मजबूर करने वाले किसी भी इक़दाम की मुख़ालिफ़ ज़रूर थी, लेकिन ऐसा महसूस होता है कि इस के दौरा की मंसूख़ी के ख़िलाफ़ बतौर-ए‍एहतेजाज ममनूआ किताब शैतानी कलिमात के चंद इक़तिबासात को पढ़ कर सुनाए जाने के मसला पर इस अदबी बिरादरी की राय मुनक़सिम हो गई।

जयपुर अदबी मेला के बारे में इबतदा-ए-से तनाज़ा जारी रहे, जिस की बुनियादी वजह इस में सलमान रुशदी की शिरकत थी, लेकिन सलमान रुशदी ने इस दौरा को मंसूख़ कर दिया, इसके बावजूद तनाज़आत का सिलसिला ख़तम नहीं हुआ। गुज़श्ता रोज़ मेला के इफ़्तेताही इजलास में चंद मुसन्निफ़ीन ने गुस्ताख मुसन्निफ़ की मुतनाज़ा किताब के चंद इक़तेबासात पढ़ कर सुनाए, जिस पर मुंतज़मीन भी हैरतज़दा रह गए, क्योंकि उन्हों ने इस की इजाज़त नहीं दी थी।

इस तरह सलमान रुशदी और इसकी किताब का मुतनाज़ा साया जयपुर अदबी मेले पर बदस्तूर मंडला रहा है। दरहक़ीक़त इस मेला के तमाम शुरका ने मुत्तफ़िक़ा तौर पर ये वाज़िह पयाम दे दिया था कि वो तमाम मुसन्निफ़ीन जिन्हों ने कल रात मुंतज़मीन की जानिब से रोके जाने के बावजूद शैतानी कलिमात के इक़तिबासात पढ़े थे, अपने अफ़आल के ज़िम्मेदार हैं।

लेकिन एक मुसन्निफ़ ऐस आनंद ने मतज़मीन के मौक़िफ़ की सख़्त मुज़म्मत की और कहा कि वो हरी कनज़रो, अमित्वा कुमार, जीत ताह्हुल और रोचीर जोशी के मौक़िफ़ की हिमायत करते हैं और रुशदी से हमदर्दी रखते हैं। आनंद ने कहा कि मुंतज़मीन की कार्रवाई अफ़सोसनाक और काबिल-ए-मुज़म्मत है, लेकिन दीगर मुसन्निफ़ीन ने क़दरे नरम ख़ू मौक़िफ़ इख़तेयार किया और कहा कि मुंतज़मीन चूँ कि इस मेला में होने वाले तमाम अवामिल-ओ-अवाक़िब के ज़िम्मेदार होते हैं, चुनांचे उन्होंने अपने शहि नशीन पर ऐसी किसी हरकत को पसंद नहीं किया, जिस से क़ानून की ख़िलाफ़वर्ज़ी का एहतिमाल था।

मुमताज़ कहानी नवीस गिरीश कर्नाड ने कहा कि जहां तक मुसन्निफ़ीन का ताल्लुक़ है, वहां भी जमहूरी हुक़ूक़ होते हैं और वो इन का इस्तेमाल करते हैं। मलयाली मुसन्निफ़ के सचिदा नंदन ने कहा कि कल के वाक़ियात ने मुझे ये सोचने पर मजबूर करदिया कि आया सब को इज़हार-ए-ख़्याल की आज़ादी हासिल है, इस हक़ के बावजूद ग़ैर ज़रूरी तनाज़ा से गुरेज़ करने के लिए बसाऔक़ात बुर्दबारी , सब्र-ओ-तहम्मुल का मज़ाहिर करना भी ज़रूरी है।

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