Wednesday , December 13 2017

जर्मनी पर लगातार हमलों से दहशत

जर्मनी : दक्षिणी जर्मनी में सीरियाई प्रवासी द्वारा विस्फोट करने से उसके खुद के मारे जाने और 12 अन्य लोगों जख्मी होने की घटना चौंकाने वाली है। यह घटना एक बार के बाहर हुई। इसे बावेरिया में एक सप्ताह के भीतर तीसरा हमला माना जएगा। इन हमलों से खुफिया एजेंसियों के कान खड़े होना स्वाभाविक है। लेकिन जर्मनी को ही बार-बार निशाना क्यों बनाया जा रहा है?

यह शरणार्थी कुछ समय से मनोरोग संस्थान में रहा था। आशंका जताई गई है कि वह आंसबाख शहर में संगीत समारोह को निशाने बनाने की फिराक में था। अच्छा हुआ कि टिकट नहीं होने के कारण वह अपने इरादों में कामयाब नहीं हो पाया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यूरोप में आने वाले शरणार्थियों के साथ आतंकियों के प्रवेश की जो आशंका जताई जा रही थी वह सच साबित हुई। यह चिंताजनक भी है कि न जाने और कितने आतंकी शरणार्थियों के भेष में यूरोप में छिपे हुए हैं।

फ्रांस के बाद गोलीबारी की घटनाओं में अब जर्मनी दूसरे स्थान पर है। ये घटनाएं अन्य देशों के लिए सबक हैं। वे अपने-अपनी सुरक्षा व्यवस्था की तुरंत समीक्षा करें और उसे चाक-चौबंद बनाएं। यूरोपीय देशों में परस्पर सूचनाओं के आदान-प्रदान को भी बढ़ाना होगा। यह तीसरा भीषण हमला है। इससे निश्चित ही लोगों में घबराहट बढ़ गई है। चूंकि हमलावर मुस्लिम समुदाय से संबंधित था इसलिए इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि उसका कोई इस्लामवादी मकसद था।

इस हमले से एक और सवाल उभर कर सामने आया है कि इस शरणार्थी के पास बम कहां से आया? म्यूनिख के हमलावर के पास स्वचलित हथियार और उसके घर से पिस्टल बरामद होने से खुफिया एजेंसियों के लिए यह जानना जरूरी हो जाता है कि इस समुदाय विशेष के लोगों को हथियारों, गोला-बारूद की सप्लाई कौन कर रहा है। इन हथियारों को लेकर ये निकलते हैं और निर्दोष लोगों की जान ले लेते हैं।

यूरोप में जर्मनी ऐसा देश है जहां बड़ी संख्या में शरणार्थियों को पनाह मिली है। लेकिन ऐसी घटनाओं से लगता है कि इससे शरण का अधिकार कमजोर होगा। संभव कुछ देश इस दिशा में कड़े कदम उठते हुए शरणार्थियों के प्रवेश पर तुरंत पाबंदी लगा दें। अथवा जिन शरणार्थियों को उन्होंने अपने यहां शरण दी है उसकी कड़ाई से जांच की जाए और संदिग्ध लोगों को उनके स्वदेश रवाना कर दिया जाए। अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए यह कार्रवाई करनी होगी। अन्यथा कई निर्दोष लोग अपनी जान से हाथ धो बैठेंगे।

जहां यह संगीत समारोह होना था वहां 2000 लोग एकत्र हुए थे। बम विशेषज्ञों को यह पता लगाना होगा कि विस्फोट किस कारण हुआ। यह भी जांच का विषय है कि हमलावर दो वर्ष पहले जर्मनी आया था, लेकिन उसके शरण संबंधी अनुरोध एक वर्ष बाद नामंजूर कर दिया गया था। फिर वह जर्मनी में कैसे टिका हुआ था ? वह पहले भी दो बार आत्महत्या का प्रयास कर चुका था। अब एक मनोरोग क्लीनिक में भी रहा था। उसे इस क्लीनिक से बाहर खुलेआम घूमने की आजादी कैसे मिल गई। अब तक उसे स्वदेश या किसी अन्य देश भिजवाने की बात ही नहीं हुई।

यूरोप में अब तक हुए घातक हमलों की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट आतंकी समूह ने ली है। इनमें ब्रसेल्स में हुए बम विस्फोटों और फ्रांस के नीस में बास्तील दिवस समारोह में हुए जनसंहार की घटना शामिल हैं। सीरिया के इस शरणार्थी द्वारा किए गए प्रयास पर ​अभी किसी आतंकी संगठन की सूचना नहीं आई है। लेकिन म्यूनिख के किशोर हमलावर पर सामूहिक हत्या करने का जुनून सवार था और उसने बंदूक से हमला करने की एक साल तक तैयारी की थी। इस हमले में नौ लोग मारे गए जिनमें अधिकतर विदेशी थे।

TOPPOPULARRECENT