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जल्लीकट्टू पर राज्य सरकार के पास कानून लागू करने की शक्ति है: अटार्नी जनरल

नई दिल्ली: तमिलनाडु में पारंपरिक त्योहार पोंगल के दौरान खेले जाने वाले जल्लीकट्टू खेल पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है जिसको लेकर राज्य भर में विरोध-प्रदर्शन चल रहे है। हजारों लोग इस फैसले के विरोध में सड़को पर उतर आए है। इसी बीच अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा है कि सांड़ों को काबू पाने के इस खेल के साथ पारंपरिक बर्ताव करने के लिए राज्य सरकार के पास कानून लागू करने की शक्ति है। हालांकि अटार्नी जनरल ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के दौरान जीव-जंतुओं को चोट नहीं पहुंचाई जानी चाहिए।

जल्लीकट्टू जैसे कार्यक्रमों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केंद्र का बचाव करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि इसकी शक्ति केंद्र के पास नहीं है क्योंकि संविधान केंद्र और राज्यों की भूमिका के बीच सीमा रेखा निर्धारित करता है। जहां तक इस खेल की बात है यह राज्य के विशेष अधिकार क्षेत्र में है। साथ में उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को न्यायालय के आदेश का सम्मान करना चाहिए।

गौरतलब है कि तमिलनाडु में जल्लीकट्टू सांडों का खेल है जिसमें सांडों के सींग पर कपड़ा बांधा जाता है और जो खिलाड़ी सांड के सींग पर बांधे हुए इस कपड़े को निकाल लेता है उसे ईनाम दिए जाते है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिनों पहले इस खेल पर रोक लगा दिया है। भारत पशु कल्याण समिति और पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) जैसे संस्थाओं का मानना है कि इस खेल से जानवरों नुकसान पहुंचता है इसलिए इसे बंद किया जाना चाहिए। इसी को लेकर इन संस्थाओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी।

वहीं अभिनेता कमल हासन, रजनीकांत और संगीतकार ए.आर. रहमान जैसे कलाकारों ने भी इस खेल का समर्थन करते हुए कहा है कि यह खेल तमिल संस्कृति का हिस्सा है और वो इसका समर्थन करते हैं। दूसकरी तरफ राज्य के मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम ने भी इसको लकेर गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है।

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