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जवान बच्चों को अख़लाक़ी तालीम देना वालदैन की ज़िम्मेदारी : अदालत

दिल्ली की एक अदालत ने ऐसे वालदैन को हिदायत दी है कि वो अपने बच्चों को अख़लाक़ी तालीम देने में आगे रहें जिन के घरों से उनकी जवान बेटियां या बेटे फ़रार होकर अपने आशिकों या माशूकों से शादी करलेते हैं, किसी भी लड़के के ख़िलाफ़ अपनी ही लड़की की इ

दिल्ली की एक अदालत ने ऐसे वालदैन को हिदायत दी है कि वो अपने बच्चों को अख़लाक़ी तालीम देने में आगे रहें जिन के घरों से उनकी जवान बेटियां या बेटे फ़रार होकर अपने आशिकों या माशूकों से शादी करलेते हैं, किसी भी लड़के के ख़िलाफ़ अपनी ही लड़की की इस्मत रेज़ि की झूटी शिकायत दर्ज करवाने से बेहतर है कि वालदैन अपनी बेटियों को अख़लाक़ी तालीम दें।

एक नौजवान को अग़वा और इस्मत रेज़ि के इल्ज़ामात से बरी करते हुए जज ने ये बात कही। जज के मुताबिक़ नौजवान बिहार का साकिन है जिसे बदक़िस्मती से उन तमाम इल्ज़ामात और मुक़द्दमा का सामना करना पड़ा, जिस जुर्म का इर्तिकाब उसने किया ही नहीं लिहाज़ा अदालत के पास उस को बरी किए जाने के अहकामात सादिर करने के इलावा कोई और मुतबादिल था ही नहीं।

जज ने मज़ीद कहा कि आज हालात इतने तरक़्क़ी याफ़ता हैं कि मोबाईल फ़ोन, इंटरनेट, केबल टी वी ने हर घर में डेरा डाल दिया है लिहाज़ा ऐसे वक़्त में वालदैन की ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है कि वो अपने जवान बच्चों की हरकात-ओ-सकनात पर नज़र रखें। उन्हें अख़लाक़ी दर्स दिया करें ताकि वो ये समझ सकें कि उन केलिए किया अच्छा है, क्या बुरा।

उन्हें ये तालीम दिए जाने की ज़रूरत है कि जिसे वो पुरकशिश समझते हैं, ज़रूरी नहीं कि वो अच्छी ही हो अच्छा ही हो। सिर्फ़ अच्छे अख़लाक़, अच्छे लोग, अच्छी सोहबत, अच्छी बातें, अच्छी तालीम ही वो चीज़ें जिन से वाबस्तगी इख़तियार की जानी चाहिए। ऐडीशनल सेशन जज वीरेंद्र भट्ट ने ये बात कही।

इस केस का फ़ैसला उन्होंने सुनाया था इस में लड़की की वालिदा ने लड़के के ख़िलाफ़ झूटी शिकायत दर्ज करवाई थी जबकि लड़की ने बाक़ायदा इक़रार किया था कि वो अपनी मर्ज़ी से लड़के के साथ गई थी और दोनों ने शादी भी करली है।

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