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जस्टिस लोया केस की सुनवाई से जस्टिस अरुण मिश्रा ने खुद को किया अलग

नई दिल्ली। जस्टिस लोया की मौत से जुड़े मामले में नया मोड़ सामने आ गया है। इस मामले की सुनवाई से जस्टिस अरुण मिश्रा ने खुद को अलग कर लिया है। जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने मंगलवार को आदेश देते हुए कहा कि इस केस को उचित पीठ को सौंपा जाए।

जज लोया मामले में सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर पीठ ने सात दिन में दस्तावेज पेश करने के लिए कहा है। पीठ का कहना है कि इस केस को उचित पीठ को सौंपा जाएगा। इस आदेश से साफ है कि जस्टिस अरुण मिश्रा ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया है।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा अब इस मामले में यह निश्चित करेंगे कि केस किसे सौंपा जाए। बता दें कि इस मामले को जस्टिस अरुण मिश्रा को सौंपे जाने के बाद चार वरिष्ठ जजों ने चीफ जस्टिस के खिलाफ आवाज उठायी थी।

वहीं जस्टिस लोया के पुत्र ने कहा कि उनके पिता की स्वभाविक मृत्यु हुई थी और परिवार को इस बात का पक्का यकीन है। अनुज लोया ने कहा, ‘‘मेरे पिता की स्वभाविक मृत्यु हुई थी, हमारे परिवार को इस बात का पक्का यकीन है।

मैंने खुद साफ किया है कि हमें कोई संदेह नहीं है। यह एक स्वभाविक मृत्यु थी।’’ उनके पिता की मौत की जांच की मांग को लेकर बंबई उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में दायर याचिकाओं के बारे में पूछे जाने पर अनुज ने कहा, ‘‘मुझे इसके बारे में कुछ नहीं कहना। मैं इसके बारे में बात करने वाला कोई नहीं हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपनी बुआ एवं दादा सहित अपने पूरे परिवार की ओर से बोल रहा हूं। हम इसे लेकर साफ बात कर रहे हैं।’’ इससे पहले अनुज ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि उन्हें अपने पिता की आकस्मिक मौत हो लेकर पहले संदेह था लेकिन अब उन्हें कोई संदेह नहीं है।

उन्होंने कहा कि उनके पिता की मृत्यु को लेकर जो बातें चल रही हैं, उनसे उनके परिवार को बहुत पीड़ा हुई है, इसलिए एनजीओ और नेताओं को इस मुद्दे को लेकर उनके परिवार के सदस्यों को परेशान करना बंद कर देना चाहिए।

दिवंगत न्यायाधीश के बेटे ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं भावनात्मक उथल-पुथल की गिरफ्त में था, अतएव मेरे मन में उनकी मृत्यु को लेकर संदेह था। लेकिन, अब मेरे मन में उनकी मौत को लेकर कोई संदेह नहीं है।’’ अनुज ने कहा, ‘‘पहले मेरे दादा और बुआ को उनकी मृत्यु को लेकर मन में कुछ संदेह था जो उन्होंने साझा किया था। लेकिन अब उनमें से किसी को भी कोई संदेह नहीं है।’’ न्यायाधीश लोया के पिता और और अनुज की बुआ ने उनकी मौत के सिलसिले में गड़बड़ी का आरोप लगाया था।

सोहराबुद्दीन शेख ‘फर्जी मुठभेड़’ कांड की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश लोया की एक दिसंबर, 2014 को कथित रूप से दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गयी थी। वह अपने एक सहयोगी की बेटी के विवाह में पहुंचे थे।

अपनी आंखों में आंसू लिये अनुज ने कहा, ‘‘हम पर नेताओं और गैर सरकारी संगठनों का कुछ दबाव आया। हम किसी का नाम नहीं लेना चाहते हैं लेकिन कृपया, अब मेरे पिता की मृत्यु के बारे में लगातार सवाल करने से हमारे परिवार को बख्श दीजिए।’’

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