ज़ंगीपुर से सासंद प्रणब मुखर्जी के बेटे छोड़ सकते हैं कांग्रेस, टीएमसी में जाने की उम्मीद!

ज़ंगीपुर से सासंद प्रणब मुखर्जी के बेटे छोड़ सकते हैं कांग्रेस, टीएमसी में जाने की उम्मीद!

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यक्रम में शामिल होने बाद भी विवाद अभी थमा नहीं है। कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेताओं और प्रणब दा की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी इसपर पहले ही कड़ी आपत्ति जता चुके हैं। अब उनके बेटे और कांग्रेस सांसद अभिजीत मुखर्जी को लेकर एक बड़ी खबर आ रही है।

एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल के जंगीपुर सीट से कांग्रेस सांसद अभिजीत मुखर्जी के तृणमूल कांग्रेस से जुड़ने की अफवाहें चल रही है।

इतना ही नहीं टीएमसी के कुछ नेताओं ने अभिजीत से मुलाकात भी की है। जिसे पहले तो वो खारिज कर चुके थे लेकिन अब शायद कुछ बात चल रही है। बता दें कि अभिजीत उसी सीट से कांग्रेस के सांसद हैं, जिसपर कभी प्रणब मुखर्जी हुआ करते थे।

रिपोर्ट में अभिजीत मुखर्जी के करीबियों के हवाले से लिखा गया है कि पहले जब मुखर्जी को टीएमसी से ऑफर मिला था, तो उन्होंने यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि इससे उनके पिता प्रणब मुखर्जी का अपमान होगा, लेकिन अब हालात बदल गए हैं।

अब खुद अभिजीत मुखर्जी तृणमूल कांग्रेस के ऑफर पर विचार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रणब मुखर्जी के संघ के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद टीएमसी को भी कुछ संभावनाएं दिखने लगी हैं। बता दें कि इससे पहले शर्मिष्ठा मुखर्जी के भी बीजेपी में शामिल होने की अफवाह उड़ी थी जिसे खुद शर्मिष्ठा ने खारिज किया था।

इससे पहले प्रणब मुखर्जी की बेटी और कांग्रेस नेता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने रविवार को कहा कि उनके पिता दोबारा राजनीति में शामिल नहीं होने जा रहे हैं। शर्मिष्ठा ने शिवसेना द्वारा प्रणब मुखर्जी के दोबारा देश की सक्रिय राजनीति में आने के कयास पर यह बयान दिया है।

शिवसेना ने कहा कि 2019 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत नहीं मिलने पर आरएसएस प्रधानमंत्री पद के लिए मुखर्जी के नाम का प्रस्ताव दे सकता है।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 7 जून को आरएसएस मुख्यालय में यहां तीसरे सालाना प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुए हैं। यहां उन्होंने संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को ‘भारत माता का एक महान सपूत’ बताया। मुखर्जी के इस शिविर में शिरकत करने का निमंत्रण स्वीकार किए जाने पर कांग्रेस और वामपंथी दलों ने आलोचना की है।

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