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ज़किया जाफरी की अर्ज़ी पर 10 अप्रैल को हुक्मनामा

एक मुक़ामी अदालत ने आज अपना हुक्मनामा 10 अप्रैल तक महफ़ूज़ कर दिया, जो ज़किया जाफरी की अर्ज़ी पर अदालती कार्रवाई है। ज़किया जाफरी ने चीफ़ मिनिस्टर नरेंद्र मोदी और दीगर के ख़िलाफ़ 2002 माबाद गोधरा फ़सादाद के सिलसिला में अपनी शिकायत पर ख़ुसूस

एक मुक़ामी अदालत ने आज अपना हुक्मनामा 10 अप्रैल तक महफ़ूज़ कर दिया, जो ज़किया जाफरी की अर्ज़ी पर अदालती कार्रवाई है। ज़किया जाफरी ने चीफ़ मिनिस्टर नरेंद्र मोदी और दीगर के ख़िलाफ़ 2002 माबाद गोधरा फ़सादाद के सिलसिला में अपनी शिकायत पर ख़ुसूसी तहक़ीक़ाती टीम (एस आई टी) की रिपोर्ट की नक़ल के हुसूल के लिए इस्तेदा पेश की है।

मेट्रो पोलटीन मजिस्ट्रेट एम एस भट्ट ने फ़सादाद के दौरान मारे जाने वाले साबिक़ कांग्रेस एम पी एहसान जाफरी की बेवा ज़किया और सुप्रीम कोर्ट की मुक़र्ररा एजेंसी की समाअत करने के बाद अपनी रोलिंग महफ़ूज़ कर दी। उन्होंने मुख़्तलिफ़ दरख़ास्तों की समाअत की, जिसमें एस आई टी के अख़ज़ कर्दा नताइज की नक़ल तलब की गई और ये रिपोर्ट जिसे गुज़श्ता माह सरबमहर लिफ़ाफ़ा में पेश किया गया, अवामी दस्तावेज़ समझने और उसे अदालत में पढ़ कर सुनाने का मुतालिबा किया गया।

एस आई टी कौंसल आर एस जमुवार ने ज़किया जाफरी की अर्ज़ी पर जवाब में ब्यान किया कि वो इस रिपोर्ट की नक़ल की हक़दार हैं, लेकिन किसी मुनासिब मरहला पर जो अभी आना बाक़ी है। उन्होंने कहा कि ज़किया जाफरी को इस रिपोर्ट की कापी उसी वक़्त देना चाहीए जब अदालत ये फ़ैसला कर ले कि आया उन की शिकायत में नामज़द अफ़राद पर मुक़द्दमा चलाया जाए या उनके ख़िलाफ़ इस केस को बंद कर दिया जाए।

बसूरत-ए-दीगर ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट के हुक्मनामा के मुग़ाइर होगा। इस मरहला पर ज़किया जाफरी की दरख़ास्त में कोई मुहासिन नहीं और ये ख़ारिज कर देने के लायक़ है।

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