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ज़रदारी को मुकम्मल इस्तिस्ना हासिल, एतिज़ाज़ अहसन का इद्दिआ

ईस्लामाबाद। 19 जनवरी ( पी टी आई ) सदर आसिफ़ अली ज़रदारी को पाकिस्तान और बैरून मुलक फ़ौजदारी मुक़द्दमात में इस्तिग़ासा से मुकम्मल इस्तिस्ना हासिल है , ये बात मुल्क के एक सरकरदा वकील ने आज कही जब कि सदर के ख़िलाफ़ बदउनवानी के केसिस क

ईस्लामाबाद। 19 जनवरी ( पी टी आई ) सदर आसिफ़ अली ज़रदारी को पाकिस्तान और बैरून मुलक फ़ौजदारी मुक़द्दमात में इस्तिग़ासा से मुकम्मल इस्तिस्ना हासिल है , ये बात मुल्क के एक सरकरदा वकील ने आज कही जब कि सदर के ख़िलाफ़ बदउनवानी के केसिस को दुबारा खोलने के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में कलीदी समाअत होने वाली है ।

पाकिस्तान पीपल्ज़ पार्टी के रहनुमा और तौहीन अदालत केस में वज़ीर-ए-आज़म के वकील बैरिस्टर एतिज़ाज़ अहसन ने एक बार फिर अपने इस मौक़िफ़ का इआदा किया है कि सदर आसिफ़ अली ज़रदारी को आईन के आर्टीकल 248 के तहत मुकम्मल इस्तिस्ना हासिल है । ईस्लामाबाद मैं सहाफ़ीयों से गुफ़्तगु करते हुए उन्हों ने कहा कि इन से मंसूब परवेज़ मुशर्रफ़ को इस्तिस्ना हासिल ना होने के बारे में जो , बाक़ौल उन के आधे ब्यानात पेश किए जा रहे हैं वो मुकम्मल सच्च नहीं।

मेरा शुरू से ये मौक़िफ़ है कि मुशर्रफ़ पर सियविल मुक़द्दमा था और इस मुक़द्दमे में उन्हें इसतिसनी हासिल नहीं। सदर ज़रदारी पर फ़ौजदारी मुक़द्दमात हैं जिन में उन्हें मुकम्मल इस्तिस्ना हासिल है और इस इस्तिस्ना को एहतिसाब अदालतों ने तस्लीम किया है। उन्हों ने मज़ीद कहा कि वयाना कनवेनशन के तहत स्विटज़रलैंड में भी सदर को इस्तिस्ना हासिल है जब तक कि वो सदर हैं।

सदरारती इस्तिस्ना से मुताल्लिक़ चीफ़ जस्टिस के अदालती रिमार्कस के हवाले से पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्हों ने कहा कि जब मेरे सामने अदालत में ये बात कही जाएगी तो मैं जज साहिबान को समझाने की कोशिश करूंगा। एतिज़ाज़ अहसन का कहना था कि मेरे ख़्याल में सोइस हुक्काम को ख़त लिखने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा।

जब उन से पूछा गया कि क्या वज़ीर-ए-आज़म तौहीन अदालत के हवाले से माफ़ी माँगेंगे तो इस पर एतिज़ाज़ अहसन का कहना था कि सदर को इस्तिस्ना हासिल होने के हवाले से वज़ीर-ए-आज़म का सोइस हुक्काम को ख़त ना लिखने पर तौहीन अदालत का केस बनता ही नहीं, ताहम कुछ बातें पर्दे के पीछे रहने दें।

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