Sunday , September 23 2018

ज़र-ए-ज़मीन पानी के बेजा इस्तिमाल से पानी के बोहरान का ख़तरा

उत्तरप्रदेश के आबपाशी के वज़ीर पारसनाथ यादव ने ज़र-ए-ज़मीन पानी के अंधा धुंद इस्तिमाल पर तशवीश ज़ाहिर करते हुए पानी का बेजा इस्तिमाल रोकने की अपील की।उन्होंने कहा कि ज़र-ए-ज़मीन पानी के ज़ख़ीरे का सही वक़्त पर जायज़ा नहीं लिया गया तो म

उत्तरप्रदेश के आबपाशी के वज़ीर पारसनाथ यादव ने ज़र-ए-ज़मीन पानी के अंधा धुंद इस्तिमाल पर तशवीश ज़ाहिर करते हुए पानी का बेजा इस्तिमाल रोकने की अपील की।उन्होंने कहा कि ज़र-ए-ज़मीन पानी के ज़ख़ीरे का सही वक़्त पर जायज़ा नहीं लिया गया तो मुस्तक़बिल में सूरत-ए-हाल भयानक होसकती है।

उन्हों ने कहा कि गांव के तालाबों को क़ाबज़ीन से ख़ाली कराके उन्हें पानी के ज़ख़ीरे में तबदील किया जाएगा।

20 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन पर बनाई जाने वाली कालोनीयों में से एक ऐक्टर ज़मीन को तालाब केलिए मुख़तस किया जाएगा और छोटी कालोनीयों में छोटे तालाबों की तामीर भी की जाय और इसी के साथ बारिश के पानी का ज़ख़ीरा और वैस्ट वाटर हार्वेस्टिंग का पूरा ध्यान रखा जाय ताकि इस मसले का कुछ हद तक हल निकल सके।

उत्तरप्रदेश एक ज़रई रियासत है जहां 70 फ़ीसद आबपाशी ज़र-ए-ज़मीन पानी पर मुनहसिर है ।

60 फ़ीसद से ज़ाइद पीने के पानी की स्पलाई और सनअतों की ज़रूरत ज़र-ए-ज़मीन पानी से ही पूरी होती है

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