Monday , December 18 2017

ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे पर महाभियोग चलाने की तैयारी में सत्तारूढ़ पार्टी

हरारे : ज़िम्बाब्वे की सत्तारूढ़ पार्टी ज़ानू-पीएफ़ राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे पर महाभियोग चलाने की तैयारी कर रही है. इस सिलसिले में मंगलवार को संसद में प्रस्ताव पेश किया जाएगा. मुगाबे पर आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी को “संवैधानिक सत्ता में दखल देने” की इजाज़त दी. ज़ानू-पीएफ़ पार्टी ने मुगाबे को इस्तीफ़ा देने के लिए सोमवार तक का समय दिया था, लेकिन मुगाबे ने ऐसा नहीं किया. पार्टी के वरिष्ठ सदस्य पॉल मंगवाना ने बताया कि यह काम सिर्फ़ दो दिन में हो सकता है यानी राष्ट्रपति मुगाबे को बुधवार तक अपने पद से हटाया जा सकता है.

ज़िम्बाब्वे के संविधान के मुताबिक़ गंभीर दुर्व्यवहार, नाक़ाबिलियत, संविधान की अनदेखी या इसे मानने, बनाए रखने और इसकी सुरक्षा करने में असफल रहने पर महाभियोग का मामला चलाया जा सकता है.

माना जा रहा है कि मंगलवार से महाभियोग की कार्रवाई शुरू होगी जिस पर नेशनल असेंबली और सीनेट में वोट डाले जाएंगे. इसके बाद दोनों सदन आरोपों की जांच के लिए एक संयुक्त समिति बनाएंगे. अगर समिति भी महाभियोग का सुझाव देती है और दोनों सदन दो-तिहाई बहुमत के साथ इस पर सहमति जताते हैं तो राष्ट्रपति को हटाया जा सकता है.

पार्टी मीटिंग से निकलते हुए वरिष्ठ नेता पॉल मंगवाना ने बताया कि “राष्ट्रपति मुगाबे पर मुख्य आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी को सरकार से जुड़े संवैधानिक मामलों में दखल देने की इजाज़त दी जबकि उनकी पत्नी के पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं था. उनकी पत्नी सरकारी अधिकारियों और उपराष्ट्रपति का सार्वजनिक रैलियों में अपमान करती रहीं. ये लोग सेना की आलोचना भी करते रहे हैं. ये सब मुख्य आरोप हैं.”

आगे बोलते हुए पॉल ने कहा कि मुगाबे ने “ज़िम्बाब्वे के संविधान को लागू करने से इंकार कर दिया है – प्रांतीय परिषद के चुनाव कराए गए, लेकिन अब तक भी किसी ने काम नहीं संभाला है. उनकी उम्र हो गई है. अब उनमें सरकार चलाने के लिए ताक़त भी नहीं बची. वे एक ज़िद्दी आदमी हैं. उन्हें पता है लोग क्या कह रहे हैं लेकिन वो सुनने को तैयार नहीं हैं.”

मनंवाना के मुताबिक़ “हम मंगलवार को प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहे हैं. आरोप बिल्कुल साफ़ हैं इसलिए उम्मीद है कि बुधवार तक संसद में वोटिंग हो जाएगी.”

अगर महाभियोग सफल रहा तो सेना कह सकती है कि मुगाबे को सेना ने नहीं, क़ानून ने हटाया. ऐसा हुआ तो मौजूदा उपराष्ट्रपति पेलेके ज़ेलम पोको को गद्दी संभालनी चाहिए.
लेकिन पेलेके ज़ेलम पोको ग्रेस मुगाबे के समर्थक माने जाते हैं. सेना उनके बजाय पूर्व उपराष्ट्रपति इमरसन मनंगावा को राष्ट्रपति बनाना चाहेगी. मनंगावा को रविवार को ज़ानू-पीएफ़ पार्टी का अध्यक्ष भी बना दिया गया है.

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