Wednesday , July 18 2018

जामा मालिया इस्लामीया के अहाते में गुज़िश्ता 9 साल से जम्हूरीयत का फ़ुक़दान

नई दिल्ली: एक ऐसे वक़्त जब तलबा के नए नुमाइंदों का इंतेख़ाबी अमल जारी है, दिल्ली यूनीवर्सिटी और जवाहरलाल यूनीवर्सिटी में तलबा यूनीयन के इंतेख़ाबात की तैयारीयां हो रही हैं, लेकिन जामिया मालिया इस्लामीया के तलबा हुनूज़ तलबा यूनीयन के अहया का मुतालिबा कर रहे हैं जिसे 9 साल क़बल बर्ख़ास्त कर दिया गया था।

वाइस चांसलर और यूनीवर्सिटी ग्रान्ट्स कमीशन ने बार-बार कहा है कि चूँकि 2006 में यूनीवर्सिटी में इंतेख़ाबात पर इमतिना आइद किया गया था। जबकि तलबा यूनीयन ने मुबय्यना तौर पर इदारे के इंतेज़ामी मामलात में दख़ल अंदाज़ी शुरू कर दी थी। यूनीवर्सिटी के हिदायात को चैलेंज करते हुए 3 तलबा 2011 में दिल्ली हाइकोर्ट से रुजू हुए थे लेकिन ये मुक़द्दमा हुनूज़ ज़ेर-ए-इलतिवा है।

तलबा ने इल्ज़ाम आइद किया है कि जम्हूरी हुक़ूक़ में तख़फ़ीफ़ की जा रही है। सिर्फ एक कतरफ़ा मुवासलाती निज़ाम उन के और इंतिज़ामीया के दरमियान बरक़रार है। तलबा ने मुतालिबा किया कि पूरे अमल को ममनू क़रार देने के बजाय यूनीवर्सिटी को चाहिए कि तलबा की सियासी सरगर्मीयों पर इमतिना आइद किया जाये।

अगर ये किसी भी तरह उनकी तालीमी सरगर्मीयों को मुतास्सिर कर सकती हूँ। एक तालिब-इल्म ने कहा कि ख़ौफ़ की नफ़सियात यूनीवर्सिटी के अहाते में पैदा कर दी गई है। हालाँकि ये यूनीवर्सिटी जम्हूरीया हिन्दुस्तान में है। ग़ैर जम्हूरी यूनीवर्सिटी हमारे क़ानूनी, बुनियादी इन्सानी हुक़ूक़ को कुचल रही है।

TOPPOPULARRECENT