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जामिआ निज़ामीया में इस्लाम का निज़ाम मईशत और मौजूदा दौर मुज़ाकरा मुफ़्ती ख़लीलअहमद और दूसरों का ख़िताब

हैदराबाद । १९ मार्च: उलूम इस्लामीया की अज़ीम दीनी दरसगाह जामिआनिज़ामीया में इस्लाम का निज़ाम मईशत और मौजूदा दौर के उनवान से एक अहम इलमीमुज़ाकरा मुनाक़िद हुआ । मुफ़क्किर इस्लाम मौलाना मुफ़्ती ख़लील अहमद शेख़ इलजामआ निज़ामीया न

हैदराबाद । १९ मार्च: उलूम इस्लामीया की अज़ीम दीनी दरसगाह जामिआनिज़ामीया में इस्लाम का निज़ाम मईशत और मौजूदा दौर के उनवान से एक अहम इलमीमुज़ाकरा मुनाक़िद हुआ । मुफ़क्किर इस्लाम मौलाना मुफ़्ती ख़लील अहमद शेख़ इलजामआ निज़ामीया ने मौज़ू से मुताल्लिक़ कलीदी ख़ुतबा पेश किया और कहा कि इस्लाम चंदरसूम और चंद इबादतों का मजमूआ नहीं बल्कि दुनिया के तमाम मसाइल का हल है ।

इस्लाम अपने अंदर ऐसी सदाक़त रखता है कि वो साईंसी इन्क़िलाबात से हरगिज़ ख़ाइफ़नहीं । उन्हों ने कहा कि इस्लाम दुश्मन ताक़तें मुसलसल कोशां हैं कि मुस्लमानों को इस्लामी धारे से हटाया जाय और उन्हें ग़ैर इस्लामी उमूर इख़तियार करने पर मजबूर किया जाय । मुफ़क्किर इस्लाम ने कहा कि यहूदी लॉबी चाहती है कि इंसान ज़िंदगी भर मक़रूज़ रहे और वो फ़िक्र मईशत से कभी आज़ाद ना हो । उन्हों ने कहा कि मुख़्तलिफ़ किस्म के इंशोरंस और क़र्ज़ा जात के ज़रीया अशीया ताय्युश की फ़राहमी इसी सिलसिला की कड़ी है जिस से इंसान हमावक़त क़र्ज़ के दलदल में फंसा रहता है ।

उल्मा बिलख़सूस तलबाजामिआ निज़ामीया को तलक़ीन की कि वो दुनिया के नशेब-ओ-फ़राज़ को महसूस करें ।मुसाबक़त के इस दौर में ज़माना के तक़ाज़ों से हम आहंग हूँ और रिसर्च-ओ-तहक़ीक़ को अपनाईं । उन्हों ने कहा कि इस तरह के प्रोग्राम के इनइक़ाद का मक़सद अवाम को जदीदमसाइल में रहनुमाई करना और तलबा पर बेहस-ओ-तहक़ीक़ की राहें खोलना है । उन्हों नेशुरका इजलास को जामिआ के मुख़्तलिफ़ ठोस इलमी प्रोजक्टस से वाक़िफ़ करवाया । मौलाना डाक्टर मुहम्मद सैफ-उल्लाह शेख़ अलादब जामिआ निज़ामीया ने इंटरनैट फ़वाइद-ओ-नुक़्सानात के उनवान से अपना तहक़ीक़ी मक़ाला पेश किया और कहा कि इंटरनैट एक दो धारी तलवार है जिस को चलाने में बे एहतियाती होजाए तो ख़ुद इस्तिमाल कनुंदामुतास्सिर होसकता है । उन्हों ने कहा कि इंटरनैट के बहुत से मुफ़ीद पहलू के साथ साथ नुक़्सानात भी बेशुमार हैं ।

इस लिए ज़बत नफ़स और इस्लाह बातिन से लैस हो कर इस्तिमाल किया जाय तो इस के मुफ़ीद नताइज बरामद होसकते हैं । उन्हों ने मुख़्तलिफ़अहादीस के हवालों से उर्यानी और फ़वाहिश की क़बाहत को ब्यान किया । मौलाना मुफ़्तीसय्यद ज़िया उद्दीन नक़्शबंदी शेख़ अलफ़क़ा जामिआ निज़ामीया ने जान-ओ-माल का इंशोरंस और शरई नुक़्ता-ए-नज़र के उनवान से तहक़ीक़ी मक़ाला पेश करते हुए इंशोरंस की जायज़-ओ-नाजायज़ शक्लों को वाज़िह किया और इस सिलसिला में शरई नितिका नज़र कोफ़िक़ही नज़ाइर और अहादीस शरीफा की रोशनी में पेश किया ।

उन्हों ने रुबा से मुताल्लिक़मुदल्लिल गुफ़्तगु की और ग़ैर इस्लामी मुल्क में बैंकों से हासिल होने वाली ज़ाइद रक़म कीहिल्लत और इस सिलसिला में किए जाने वाले एतराज़ात का अहादीस शरीफा की रोशनी मेंमुफ़स्सिल जायज़ा लिया। मौलाना हाफ़िज़ मुहम्मद लतीफ़ अहमद नायब शेख़ अलफ़क़ाजामिआ निज़ामीया ने इस्लामी बैंकिंग सिस्टम के उनवान से अपना पुरमग़्ज़ मक़ाला पेश किया और कहा कि मुस्लमान अह्ले इल्म-ओ-दानिश्वर अगर तवज्जा करें तो इस्लामी बैंकिंग सिस्टम मौजूदा सोदी बैंककारी निज़ाम का बेहतरीन मुतबादिल साबित होसकता ही। उन्हों ने कहा कि इस्लाम ने अपने आग़ाज़ ही में मुस्लमानों को इक़तिसादी उमूर से वाक़िफ़ करवाया । इस्लाम मआशी इस्तिहकाम को कभी नजरअंदाज़ नहीं करता ।

उन्हों ने मौजूदा बैंकिंग सिस्टम के नक़ाइस की निशानदेही की । मौलाना हाफ़िज़ मुहम्मद क़ासिम सिद्दीक़ी तसख़ीर नायब मुफ़्ती जामिआ निज़ामीया ने मार्किटिंग के मौजूदा तरीक़े और हदूद शरीयत के उनवान से मालूमाती मक़ाला पेश करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में सिर्फ हुसूल मुनफ़अत के वाहिद मक़सद को पेशे नज़र रखते हुए हर दरुस्त-ओ-ग़ैर दरुस्त तरीक़े अपनाए जा रहे हैं जिस की इस्लाम क़तई इजाज़त नहीं देता ।

इस्लाम में दरोग़ गोई और धोका की किसी सूरत में इजाज़त नहीं । इस्लाम ऐसी तिजारत की इजाज़त देता है जिस में सूद और जो्वे का शाइबा ना हो । मुआमलत में कोई धोका ना हो । मार्किटिंग के ज़रीया इंसानीन फ़सियात का इस्तिहसाल ना किया जाय । तिजारत के दौरान क़ानूनी उसूलों पर अमल किया जाय । मार्किटिंग के लिए सिनफ़ नाज़ुक के उर्यां-ओ-नियम उर्यां इश्तिहारात की इस्लामी में क़तई गुंजाइश नहीं । मौलाना मुहम्मद अनवार अहमद कादरी नायब शेख़ अलतफ़सीर ने निज़ामत के फ़राइज़ अंजाम दिए मौलाना हाफ़िज़ मुहम्मद अबैदुल्लाह फ़हीमकादरी मुल्तानी मुंतज़िम जामिआ निज़ामीया ने इंतिज़ामात की निगरानी की । मौलवी हाफ़िज़ मुहम्मद फ़हीम उद्दीन ने करावएऒत के ज़रीया तिलावत कलाम मजीद की ।

मौलवीहाफ़िज़ मुहम्मद ग़ुलाम ग़ौस ने नाअत शरीफ़ पेश की । इस मौक़ा पर शयूख़ जामिआ उल्मा किराम मशाइख़ उज़्ज़ाम तलबा क़दीम जामिआ निज़ामीया असातिज़ा-ओ-तलबा केइलावा आमৃ अल मुस्लिमीन की कसीर तादाद ने शिरकत की ।

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