Tuesday , November 21 2017
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जामिया के छात्र जीत गये, लेकिन गिद्द लौटकर फिर आयेंगे जागते रहो !

आख़िरकार वही हुआ ! जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी को अपने भाषणों में आतंकवादियों को पैदा करने वाला संस्थान कहने वाला शख़्स ही जब देश की सत्ता के सबसे बडे सिंघासन पर जाकर बैठ गया हो तो उसके द्वारा इस यूनिवर्सिटी को फूल के बदले गोली ही मिलेगी ये तो पहले से ही तय था ।

सिक्योरिटी के नाम पर आज जामिया मिल्लिया यूनीवर्सिटी में पुलिस की रेड के द्वारा जिस प्रकार वहाँ के वातावरण में भय और ख़ौफ का बीज बोया गया है ये इस बात का प्रबल सूचक है कि काग्रेंस की ही तर्ज पर एक बार फिर भाजपा ने बटला हाऊस में फर्ज़ी ऐनकाउटंर में शहीद किये गये आतिफ की तरह ही कुछ निर्दोषों को अपने निशाने पर लेकर जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी को बदनाम कर उसके अल्पसंख्यक दर्जे को ख़त्म करने के लिये कमर कस ली है । दरअसल देखा जाये तो मोदी सरकार के इशारे पर जामिया के विघार्थियों पर ये मानसिक दवाब बनाकर पुलिस बल का एकमात्र ट्रायल था कि अगर इस संस्थान के अल्पसंख्यक दर्जे को हटाया गया तो ये कितना लोहा ले पायेंगे , फिल्हाल तो जामिया के विघार्थी जीत गये है , लेकिन ये जंग लम्बी चलने वाली है , गिद्द लौटकर फिर आयेंगे जागते रहो !

डॉ: उमर फारूक आफरीदी

(यह लेखक के निजी विचार हैं)

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