Friday , December 15 2017

जामिया वासियों ने की मांग, भोपाल इनकाउंटर का सुप्रीम कोर्ट की अगुआई में हो जांच

 

 

भोपाल फर्जी इनकाउंटर के विरोध में जामिया स्थित जाकिर हुसैन मकबरा से सत्याग्रह का शुरूआत की गई। इस मुहिम में स्थानीय लोगों ने एकठ्ठा होकर सरकार से यह
मांग रखा कि सिमी आठ अंडरट्रायल कैदियों के हुए फर्जी एनकाउंटर पुलिस कास्टेबल रमा शंकर हत्या की जांच सुप्रीम कोर्ट कि निगरानी में करवाया जाए। सत्याग्रही
आमीक जामई ने सभा में बोलते हुए कहा कि इस प्रोटेस्ट का मकसद सुप्रीम कोर्ट की अगुआई में न्यायिक जांच की मांग है। हम चाहते हैं कि उन सारे बिंदुओं पर जांच हो जहां इस हत्याकांड में अनदेखी की जा रही है। अमीक जामेई ने कहा कि मीडिया वही कहती है जो एक खास तबके के लोग कहते हैं। हम नहीं मानते कि वो आतंकी नहीं थे बल्कि यह मानते हैं कि वे आठो अंडरट्रायल थे। जिस दिन सुप्रीम कोर्ट कह देगा वो आतंकी थे उस दिन हम भी मान लेंगे। जिस दिन उन अपराध साबित हो जाए उनको सुली पर चढ़ा दो। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को टारगेट के साथ निशाना बनाया जा रहा है। उनके खिलाफ गलत अवधारणा बनाई जा रही है।

अमीक जामेई ने ये भी कहा कि हमें इस संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए उना के दलित आंदोलन से सबक लेना चाहिए। जब कथित गोऱक्षकों के हाथों पीटा गया तो वो इस नाइंसाफी के खिलाफ चुप रहने के बजाय संघर्ष किया और गुजरात सरकार की ईट से ईट से बजा दी।

वहीं इस पर लोगों से बात करते हुए स्थानीय नेता परवेज आलम का कहना है कि हिंदुस्तान में शायद ही मुसलमानों का शाहबानो केस के बाद कोइ मूवमेंट खड़ा हुआ हो। हमें इस मुहिम में एक साथ खड़े होना होगा और इस संघर्ष को आगे बढ़ाना होगा।

जामिया के पूर्व स्टूडेंट  जाकिर रियाज ने इस नुक्कड़ सभा अपने बातों को रखते हुआ कहा की आखिर हम इतने डिफेन्सिव क्यों होना पड़ता है। ज़ुल्म अगर हुआ है तो वो गलत है और उसका विरोध करने का हमारा संविधानिक अधिकार है।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जेएनयू के पूर्व नेता नसीम अशरफ ने आरोप लगाया कि जब से राजग सरकार सत्ता में आई है मुस्लिमों को गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, हम सभी आतंकवादियों के खिलाफ हैं लेकिन आतंक के खिलाफ लड़ाई सभी वर्गों को एकजुट कर लड़ी जानी चाहिए ना कि सिर्फ खास वर्ग के लोगाें को निशाना बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार बेकसूर लोगों को निशाना बनाकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर कर रही है।

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