जिलावतनी की ज़िंदगी गुज़ारना आसान नहीं

जिलावतनी की ज़िंदगी गुज़ारना आसान नहीं
मुंबई, 01 जनवरी( एजेंसी) हिंदूस्तानी फ़िल्मी सनअत जहां तक़रीबन हर ज़बान में फ़िल्म बनाई जाती है लेकिन कभी कभी ऐसा भी होता है कि बाली वुड दीगर ज़बानों की फ़िल्मी सनअत ख़ुद को मरबूत करने में नाकाम होजाती है लेकिन जब कोई ऐसा तनाज़ा पैदा हो

मुंबई, 01 जनवरी( एजेंसी) हिंदूस्तानी फ़िल्मी सनअत जहां तक़रीबन हर ज़बान में फ़िल्म बनाई जाती है लेकिन कभी कभी ऐसा भी होता है कि बाली वुड दीगर ज़बानों की फ़िल्मी सनअत ख़ुद को मरबूत करने में नाकाम होजाती है लेकिन जब कोई ऐसा तनाज़ा पैदा हो जाता है जिससे फ़िल्मसाज़ों के इलावा अदाकारों को भी ये महसूस होने लगता है कि आज़ादी इज़हार-ए-ख़्याल के मुग़ाइर है तो सारी ज़बानों की सनअतें क़ाबिल-ए-सताइश इत्तिहाद का मुज़ाहिरा करती हैं ।

जिस वक़्त शाहरुख ख़ान की फ़िल्म माई नेम इज़ ख़ान पर तनाज़ा खड़ा हो गया था उस वक़्त भी फ़िल्मी सनअत ने उनकी पुश्तपनाही की थी जबकि मुंबई में शिवसेना ने शाहरुख का जीना हराम कर दिया था । यही हाल अब कमल हासन की विश्वारूपम के साथ भी है जहां बालीवुड के कई बड़े अदाकार बिशमोल सलमान-ओ-शाहरुख कमल हासन की ताईद कर रहे हैं ।

इनका यही कहना है कि मुआमला को बाहमी रजामंदी से हल कर लेना चाहीए । तनाज़े कई किस्म के होते हैं लेकिन जब मुआमला मज़हबी जज़बात के मजरूह होने का आ जाए तो हालात नाज़ुक हो ही जाते हैं । कमल हासन का आज़ादी इज़हार-ए-ख़्याल की दुहाई देना एक तरफ़ और दूसरी तरफ़ मरहूम एम एफ़ हुसैन और उनकी जिलावतनी का तज़किरा कुछ बेमानी और बेवक्त की रागिनी मालूम होता है ।

इतनी छोटी से बात पर मुल्क छोड़ देने की धमकी सिर्फ़ धमकी ही होती है । जिलावतनी की ज़िंदगी गुज़ारना हर एक के बस की बात नहीं । सलमान और शाहरुख सैक्यूलर मुसलमान हैं जहां वो ईद के इलावा हिंदुओ और ईसाईयों के त्योहार भी मनाते हैं । अगर कमल हासन भी ऐसे ही हैं तो उनका सैक्यूलर अज़्म उनको मुबारक!

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