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जीडीपी पर नोटबंदी का दुष्प्रभाव इस तीमाही भी पड़ सकता है: रिजर्व बैंक

नई दिल्ली: सोमवार को रिजर्व बैंक इंडिया के डिप्टी गवर्नर विरल वी. आचार्य ने कहा कि नोटबंदी के तीन महीने बाद भी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर इसका बुरा असर देखने को मिल सकता है. इस तिमाही में भी जीडीपी पर इसका बुरा असर पड़ सकता है. इस संकट से निपटने के सवाल पर उनहोंने कहा कि नोटबंदी के बाद बाजार में नए नोट डालने का काम बहुत तेजी से चल रहा है और यह दो-तीन महीने में पूरा हो जाएगा.

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एनडीटीवी इंडिया के मुताबिक, डिप्टी गवर्नर से जब जीडीपी के अनुमानों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हमारी मौद्रिक नीति समिति के अनुमान या केंद्रीय सांख्यिकिकी कार्यालय के अनुमानों के काफी हद तक आस-पास हैं.

उनहोंने स्पष्ट रूप से यह भी कहा कि मैं यह नहीं कह रहा कि यह अस्थायी असर अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्सों पर कठोर नहीं पड़ा है, लेकिन आप मान कर चलें कि इसका असर अस्थायी ही रहेगा. इसके अलावा उनहोंने कहा कि निश्चित रूप से अर्थव्यवस्था को गति देने वाले क्षेत्र अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि लोगों ने कुछ एक बातें अच्छी उठाई हैं और उन पर विचार किया जा सकता है.

आपको बता दें कि नोटबंदी जैसे संकट से निपटने पर आचार्य ने कहा कि नए नोट डालने का काम तेजी से चल रहा है. हमें अभी कुछ सफर और तय करना है. दो से तीन महीने में हालात स्थिर जायंगे.

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