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जुमा को इसराईली कौंसिलख़ाना के घेराव

फ़लस्तीनी अवाम से इज़हार यगानगत करते हुए पाँच सियासी जमातों ने मुशतर्का तौर पर जुमा को इसराईली कौंसिलख़ाना के घेराव का इंतिबाह दिया है। समाजवादी पार्टी महाराष्ट्र यूनिट के सदर और रुकन असैंबली अब्बू आसिम आज़मी ने ज़राए इबलाग़ के नुम

फ़लस्तीनी अवाम से इज़हार यगानगत करते हुए पाँच सियासी जमातों ने मुशतर्का तौर पर जुमा को इसराईली कौंसिलख़ाना के घेराव का इंतिबाह दिया है। समाजवादी पार्टी महाराष्ट्र यूनिट के सदर और रुकन असैंबली अब्बू आसिम आज़मी ने ज़राए इबलाग़ के नुमाइंदों से बात चीत करते हुए कहा कि हम ने जुमा को इसराईली कौंसिख़ाना के घेराव का फैसला किया है ताकि फ़लस्तीनी अवाम के साथ यगानगत और ताईद इज़हार किया जा सके।

उन्हों ने मुल्क की अवाम से इसराईली मसनूआत के बाईकॉट की अपील की ताकि उसे मआशी तौर पर कमज़ोर किया जा सके। उन्होंने बताया कि आज एक इजलास में एहितजाजी प्रोग्राम का फैसला किया गया जिस में समाजवादी पार्टी , सी पी आई , सी पी आई एम , जनता दल एस और बीबी एम के नुमाइंदों ने शिरकत की।

अबू आसिम आज़मी ने कहा कि अक़वाम-ए-मुत्तहिदा सेक्योरिटी कौंसिल इस लड़ाई को रोकने के लिए मूसिर इक़दामात में नाकाम रही। इसके नतीजा में बड़े पैमाना पर बेक़सूर अवाम की अम्वात हुई है। वो इस बात को समझने से क़ासिर है कि अक़वाम-ए-मुत्तहिदा सलामती कौंसल का वजूद ही क्यों है? ये इदारा तशद्दुद को जब रोक नहीं सकता तो इसे बरक़रार भी क्यों रखा गया ? जब सद्दाम हुसैन को हलाक किया गया तब इराक़ में चंद लोगों ने कहा था कि इन का हश्र वही हुआ जो वो दूसरों के साथ करते थे लेकिन जब इसराईली फ़ौज आम शहरियों , हॉस्पिटल्स और यूनीवर्सिटीज़ को तबाह कर रही है तो फिर अक़वाम-ए-मुत्तहिदा को ये हक़ीक़त दिखाई क्यों नहीं दे रही है और वो तशद्दुद को रोकने के लिए ठोस इक़दामात क्यों नहीं कर रहा है?

उन्होंने राज्य सभा में इसराईल की मुज़म्मत में क़रारदाद पेश ना करने पर एन डी ए हुकूमत को तन्क़ीदों का निशाना बनाया है और कहा कि इस से हिंदुस्तान को संगीन मआशी नुक़्सान होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा हुकूमत फिरका परस्त है। जब कभी मुसलमानों की तरक़्क़ी का मौक़ा आता है तो वो उसे किसी भी इक़दाम की मुख़ालिफ़त करती है जिस से मुसलमानों को फ़ायदा पहुंचे। अगर मौजूदा हुकूमत का फिरकापरस्त चेहरा दुनिया के सामने बेनकाब होजाए तो हिंदुस्तान को संगीन मआशी ख़सारा होगा कई मुस्लिम ममालिक के साथ हिंदुस्तान के दोस्ताना रवाबित हैं।

उन्होंने कहा कि अगर हिंदुस्तान का ये इस्तिदलाल है कि इसराईल और फ़लस्तीन के साथ इसके दोस्ताना रवाबित हैं तब भी उसे इंसाफ़ पर मुबनी वाज़िह मौक़िफ़ इख़तियार करना चाहिए।

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