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जेएनयू में अल्पसंख्यक, ओबीसी और दलित छात्रों का इंटरव्यू में भेदभाव के खिलाफ प्रदर्शन

नई दिल्ली: देश की सबसे प्रतिष्ठित युनिवर्सिटी जेएनयू में होने वाले एडमिशन को लेकर हो रहे कुछ कथित धांधली को लेकर इन दिनों एक मुद्दा गरमाया हुआ है. जेएनयू के दलित, आदिवासी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र पिछले दो-तीन दिनों से एक एकेडमिक कौंसिल मीटिंग कर रहे हैं. यह मीटिंग जेएनयू के एक छात्र संगठन यूनाइटेड ओबीसी फोरम के तत्वाधान में आयोजित की जा रही है. जेएनयू में एडमिशन प्रक्रिया में हो रहा इंटरव्यू इस मीटिंग की वजह बना है.

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नेशनल दस्तक के अनुसार, जेएनयू में इंटरव्यू मार्क्स को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. बता दें कि जेएनयू में लिखित और इंटरव्यू के माध्यम से छात्रों का एडमिशन होता है. इसमें 70 मार्क्स की लिखित परीक्षा और 30 मार्क्स का इंटरव्यू होता है. यूनाइटेड ओबीसी फोरम का कहना है कि इंटरव्यू के मार्क्स 30 नंबर से घटाकर 15 मार्क्स किए जाएं.
दरअसल जेएनयू में लिखित परीक्षा के साथ-साथ इंटरव्यू भी लिए जाते हैं और इंटरव्यू तथा लिखित परीक्षा दोनों के मार्क्स को जोड़कर फाइनल रिजल्ट तैयार किया जाता है. दलित, आदिवासी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र परीक्षा तो क्लियर कर लेते हैं, लेकिन इटरव्यू में शायद द्रोणाचार्यों के शिकार बन जाते हैं. इंटरव्यू में उनके साथ खुलेआम भेदभाव किया जाता है.
ओबीसी फोरम के छात्र नेता दिलीप यादव कहते हैं कि अब्दुल नासे कमेटी ने भी इस बात को स्वीकार किया कि जेएनयू के अंदर दलित, ओबीसी, आदिवासी और अल्पसंख्यकों के साथ इंटरव्यू में नंबर देने के दौरान भेदभाव किए जाते हैं.
दिलीप यादव बताते हैं कि दलित, ओबीसी, आदिवासी और अल्पसंख्यक छात्रों के साथ इंटरव्यू में भेदभाव किया जाता है. वह बताते हैं कि इटरव्यू में सवर्ण छात्रों को 30 में से 20 से 25 तक नंबर दिए जाते हैं वहीं दलित और पिछड़ों को महज 4 से 5 नंबर तक ही दिए जाते हैं. वह कहते हैं कि उनके संगठन की लड़ाई इसी भेदभाव के खिलाफ है.

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