Monday , December 11 2017

जेनेवा कोंफ्रेंस के नताईज़ को अपोजीशन ने मुस्तरद कर दिया

रूसी वज़ीर-ए-ख़ारजा का कहना था कि जिनेवा मुआहिदे (समझौता) का मक़सद हरगिज़ ये नहीं है कि असद को इक़तिदार (सत्ता ) से अलग हो जाना चाहिए। इस के बरअक्स (विपरीत) शामी (सीरियन) अपोज़ीशन का कहना है कि शाम (सीरिया) में क़ियाम अमन के लिए ज़रूरी ह

रूसी वज़ीर-ए-ख़ारजा का कहना था कि जिनेवा मुआहिदे (समझौता) का मक़सद हरगिज़ ये नहीं है कि असद को इक़तिदार (सत्ता ) से अलग हो जाना चाहिए। इस के बरअक्स (विपरीत) शामी (सीरियन) अपोज़ीशन का कहना है कि शाम (सीरिया) में क़ियाम अमन के लिए ज़रूरी है कि सदर असद हुकूमत से अलग हो जाएं।

अदीब शीशकली का बहरहाल कहना है कि अगर रूस ने इस मुआहिदे (समझौता) पर दस्तख़त किए हैं तो इस का मतलब है कि ये मुआहिदा सदर बशर अल असद के हक़ में है। हम असद को नहीं बल्कि आज़ाद इंतिख़ाबात (चुनाव) और एक नई हुकूमत चाहते हैं।

जिनेवा कान्फ़्रैंस में शाम (सीरिया) के नुमाइंदों के इलावा ना तो सऊदी अरब ने शिरकत की है और ना ही ईरान ने। यही वजह है कि ईरान ने भी इस कान्फ़्रैंस को नाकाम क़रार दिया है।

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