Monday , June 25 2018

झामुमो को इंकम टैक्स महकमा का नोटिस

झारखंड मुक्ति मोरचा की तरफ से चंदे के तौर में मिले 53 लाख रुपये का तफ़सीली वज़ाहत नहीं देने पर इंकम टैक्स महकका ने 23.31 लाख रुपये टैक्स चुकाने का नोटिस जारी किया है।

झारखंड मुक्ति मोरचा की तरफ से चंदे के तौर में मिले 53 लाख रुपये का तफ़सीली वज़ाहत नहीं देने पर इंकम टैक्स महकका ने 23.31 लाख रुपये टैक्स चुकाने का नोटिस जारी किया है।

ताहम महकमा की तरफ से इंकम टैक्स एक्ट 1961 की दफा 156 के तहत डिमांड नोटिस भेजे जाने के बाद पार्टी ने चालान नंबर 00169 के जरिये इंकम खाते में 6.5 लाख रुपये की अदायगी किया है। पार्टी की दरख्वास्त को देखते हुए फिलहाल सजा तय करने की कार्रवाई रोक दी गयी है।

छूट का फाइदा नहीं मिला

महकमा के ज़राये के मुताबिक, झामुमो की तरफ से साल 2010-11 के लिए दाखिल इंकम टैक्स रिटर्न में चंदे का नमूकम्मील तफ़सीलात दिया गया था। कहा गया था कि असेसमेंट इयर 2010-11 में उसे कुल 66 लाख रुपये की आमदनी हुई। पार्टी को यह रकम मुखतलिफ़ कंपनियों और लोगों की तरफ से दिये गये चंदे के तौर में मिली है।

पार्टी ने कुछ कंपनियों से मिले 13 लाख रुपये का वसीह तफ़सीलात पेश किया था। पर, इसमें चंदे के तौर में मिले 53 लाख रुपये का तख़मीना नहीं था। देहिंदगान के नाम वगैरह का भी ज़िक्र नहीं किया था। इस वजह से सियासी पार्टियों को मिलनेवाली इंकम टैक्स से पूरी छूट का फायदा झामुमो को नहीं मिला और उस पर टैक्स लगाया गया।

टैक्स से आज़ाद है जमातों की आमदनी

मालूम हो कि इंकम टैक्स एक्ट की दफा 13(ए) के तहत सियासी जमातों को चंदा, सेक्यूरिटीस से मिलनेवाली इन्टरेस्ट और ज़ायदाद से होनेवाली आमदनी पूरी तरह टैक्स से आज़ाद है।

छूट का फायदा लेने के लिए सियासी पार्टियों को भारतीय लोक नुमायंदगी एक्ट की दफा 29(ए) के तहत रजिस्टर्ड होना जरूरी है। सियासी पार्टियों को चंदा देनेवाली कंपनियों को भी इंकम टैक्स में दफा 80 जीजीसी के तहत छूट मिलती है। साथ ही इस रकम पर कंपनी को इंकम टैक्स और एजुकेशन सेस का अदायगी नहीं करना पड़ता है।

हालांकि सियासी पार्टियों को अपनी आमदनी के ज़रियों का तौसीह तफ़सीलात नहीं देने की हालत में इंकम टैक्स महकमा की तरफ से उसे जेनरल आमदनी मान कर इनकम टैक्स और एजुकेशन सेस लगाने की तजवीज है। रियासत के इंकम टैक्स अफसरों ने इसी तजवीज के तहत झामुमो को चंदे के तौर में मिले 53 लाख रुपये को आम आमदनी मानते हुए इस पर टैक्स और एजुकेशन सेस की रकम तय की है।

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