Friday , December 15 2017

झामुमो में बगावत के सुर तेज

झामुमो के लिए लोकसभा इंतिख़ाब झंझावत लेकर आया है। पार्टी में भगदड़ मच गयी हैं। वहीं जो पार्टी में हैं भी, तो नाराज चल रहे हैं। जो खुल कर बोले, वह पार्टी छोड़ कर चले गये। जो हैं, वह अब 11 मार्च का इंतजार कर रहे हैं। 11 मार्च को शिबू सोरेन टि

झामुमो के लिए लोकसभा इंतिख़ाब झंझावत लेकर आया है। पार्टी में भगदड़ मच गयी हैं। वहीं जो पार्टी में हैं भी, तो नाराज चल रहे हैं। जो खुल कर बोले, वह पार्टी छोड़ कर चले गये। जो हैं, वह अब 11 मार्च का इंतजार कर रहे हैं। 11 मार्च को शिबू सोरेन टिकट की ऐलान करेंगे। वह अभी चेन्नई में हैं। वजीरे आला हेमंत सोरेन उन्हें लाने के लिए सनीचर को चेन्नई चले गये हैं।

इधर, झामुमो में बागियों की लिस्ट में हर दिन नये नाम जुड़ते जा रहे हैं। अब तक पलामू के एमपी कामेश्वर बैठा और साबिक़ वज़ीर और एमएलए हेमलाल मुरमु झामुमो को अलविदा कर चुके हैं। झामुमो सरबराह शिबू सोरेन के भाई लालू सोरेन ने भी झामुमो से पल्ला झाड़ लिया है। उन्होंने 30 साल तक झामुमो में रहने के बाद तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया है। अब वह झामुमो सरबराह और अपने बड़े भाई शिबू सोरेन के खिलाफ ही इंतिख़ाब लड़ने के लिए ताल ठोंक रहे हैं। वजीरे आला हेमंत सोरेन ने कहा है कि जम्हूरियत में कोई भी इंतिख़ाब लड़ सकता है। दूसरी तरफ, अभी कई और कारकुनान भी हैं, जो उम्मीदवारों की ऐलान का इंतजार कर रहे हैं।

शिबू के भाई लालू सोरेन ने पार्टी पर तानाशाही होने का इल्ज़ाम भी लगाया। कमोबेश यही इल्ज़ाम हेमलाल मुरमू, कामेश्वर बैठा भी लगा चुके हैं। पौलुस सुरीन शुरू में नाराज थे, फिर मान गये हैं। गौरतलब है कि हेमलाल मुरमू पार्टी के सीनियर और काबिल लीडर रहे हैं। वह एमपी रह चुके हैं। रियासत में वज़ीर भी रह चुके हैं। उन्होंने सीनियर लीडरान की नज़रअंदाज़ का इल्ज़ाम लगाते हुए कहा कि पार्टी अब शिबू सोरेन के हाथ से निकल रही है। हेमंत सोरेन पर वार करते हुए उन्होंने कहा कि बे काबिल लोग अब पार्टी मे मनमानी करेंगे, तो सीनियर लीडरों को अपना रास्ता देखना ही होगा। जबकि हेमंत सोरेन कहते हैं कि वह आज भी हेमलाल मुरमू की इज्जत करते हैं। कामेश्वर बैठा ने पार्टी पर पलामू सीट बेचने का इल्ज़ाम लगाया है। उनका कहना है कि जब यह सीटिंग सीट थी, तो इत्तिहादी दलों को कैसे मिल सकती थी। उन्होंने पार्टी को दलित मुखालिफत तक बताया था।

दूसरी तरफ पार्टी के लीडर कहते हैं कि पलामू के कारकुनान से कामेश्वर बैठा पूरी तरह कट चुके थे। यही वजह है कि इत्तिहादी दलों को देने पर गौर हो रहा था, पर कोई फैसला नहीं हुआ था। इसके पहले ही मिस्टर बैठा ने अपना रास्ता अलग कर लिया। पार्टी के तर्जुमान विनोद पांडेय कहते हैं कि जो लोग भी ऐसा कर रहे हैं, हड़बड़ी में कर रहे हैं और अपनी कमजोरी को ही ज़ाहिर कर रहे हैं। पार्टी फिर भी मजबूती से खड़ी है और लोकसभा में बेहतर मुजाहिरा करेगी।

इधर, पार्टी ज़राये ने बताया कि गिरिडीह से मथुरा महतो भी इंतिख़ाब लड़ना चाहते थे, पर जगन्नाथ महतो को पार्टी टिकट देने जा रही है। हालांकि, मथुरा महतो ने खुल कर नाराजगी जाहिर नहीं की, पर वह सात मार्च की बैठक से जल्द ही निकल गये थे। उधर, जमशेदपुर में सविता महतो के हक़ में जहां पार्टी के ज्यादतर लोग हैं, वहीं चंपई सोरेन भी इसी सीट से इंतिख़ाब लड़ना चाहते हैं। इसे लेकर भी अभी तनाज़ा है। राजमहल से विजय हांसदा को लड़ाने पर कांग्रेस ने पहले ही नाराजगी जाहिर कर दी है। हालांकि, वजीरे आला ने कहा कि उन्होंने विजय हांसदा का यरगमाल तो नहीं किया है। वह अपनी ख्वाहिश से झामुमो से जुड़े हैं। पार्टी में जो भी आयेंगे, उनका इस्तकबाल है। हालांकि अब तनाजे से निपटने के लिए पार्टी शिबू सोरेन को ही आगे करने जा रही है। यही वजह है कि 11 मार्च को शिबू ही टिकट का ऐलान करेंगे।

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