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झारखंडी मजदूर मुल्क में सबसे सस्ते

मरकज़ की निगाह में झारखंड के मनरेगा मजदूर सबसे सस्ते हैं। इसीलिए मरकज़ी देही तरक़्क़ी वुजरा ने यहां ने मनरेगा मजदूरों की मजदूरी महज़ 162 रुपये रोजाना तय की है। मशरिकी भारत के रियासतों में रोजगार की कमी और बेरोजगारों की तादाद ज़्यादा होन

मरकज़ की निगाह में झारखंड के मनरेगा मजदूर सबसे सस्ते हैं। इसीलिए मरकज़ी देही तरक़्क़ी वुजरा ने यहां ने मनरेगा मजदूरों की मजदूरी महज़ 162 रुपये रोजाना तय की है। मशरिकी भारत के रियासतों में रोजगार की कमी और बेरोजगारों की तादाद ज़्यादा होने की वजह ऐसा हुआ है। मरकज़ी ने हरियाणा के मजदूरों के लिए सबसे ज़्यादा 250 रुपये रोजाना तय किया है।

झारखंड में मजदूरों की कम अज़ कम मजदूरी 178 रुपये रोजाना तय है। अभी इस माली साल में तर्मीम के बाद कम अज़ कम मजदूरी 190 रुपये से ज़्यादा होने की उम्मीद है। ऐसे में कोई देही क्यों मनरेगा में रोजगार तलाशेगा। शायद, इसी वजह से मनरेगा झारखंड में कामयाब नहीं हो पा रहा है।

36 लाख फैमिली में सिर्फ 11 लाख फॅमिली ही मनरेगा में काम मांगा। मनरेगा के कामयाब नहीं होने और रियासती हुकूमत की तरफ से देही मजदूरों की रोजी के लिए कुछ ठोस उपाय अब तक नहीं कर पाई है। इससे यहां के मजदूर पलायन कर जाते हैं। तकरीबन नौ लाख झारखंडी मजदूर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश , बिहार और दीगर रियासतों में काम करने जाते हैं। साथ ही ख़लीज मुल्कों में भी 10 हजार से ज़्यादा मजदूर काम कर रहे हैं।

बहुत खराब मजदूरी तय हुई है। इससे मजदूर मनरेगा का काम नहीं करेंगे। रियासती हुकूमत की तरफ से इसका मुखालिफत दर्ज कराया जाएगा। मरकज़ी देही तरक़्क़ी सेक्रेटरी 15 अप्रैल को आ रहे हैं। उनसे कम से कम रियासत की कम अज़ कम मजदूरी के बराबर तय करने की दरख्वास्त किया जाएगा।
विजय कुमार सिंह, मनरेगा कमीशन

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