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झारखंड के असल बाशिंदे की होगी अलग शिनाख्त

रियासत के असल बाशिंदे और झारखंड के रिहायशीयों की शिनाख्त अलग- अलग होगी। मुक़ामी लोगों का खाका कमेटी की बुध को हुई बैठक में इस पर मंजूरी बनी। असल बाशिंदे वे होंगे जो यहां के रैयती हैं और जिनका नाम गुजिशता बार हुए सर्वे में दर्ज है। ऐस

रियासत के असल बाशिंदे और झारखंड के रिहायशीयों की शिनाख्त अलग- अलग होगी। मुक़ामी लोगों का खाका कमेटी की बुध को हुई बैठक में इस पर मंजूरी बनी। असल बाशिंदे वे होंगे जो यहां के रैयती हैं और जिनका नाम गुजिशता बार हुए सर्वे में दर्ज है। ऐसे लोग जो यहां के असल वासी तो हैं, पर जिनके पास ज़मीन नहीं हैं, उनका नाम रियासती ग्राम के बेज़मीनों की फेहरिस्त में दर्ज किया जाएगा। रियासत की तशकील के वक़्त झारखंड तक़सीम वैसे अफसर-मुलाज़िमीन, जिन्होंने दूसरे रियासत के होते हुए भी अपनी पूरी नौकरी यहां की, उन्हें भी झारखंडवासी माना जा सकता है। वैसे तालिबे इल्म, जिन्होंने चौथी क्लास से लेकर 12वीं तक पढ़ाई झारखंड में की है, को भी झारखंड रिहायशी माना जा सकता है। 1985 से झारखंड में रह रहे वैसे लोग, जिन्होंने यहां पर जायदाद जमा की है, को भी झारखंड रिहायशी माना जा सकता है।

खाका पर तकरीबन बन चुकी है मंजूरी : राजेंद्र

बैठक के बाद कमेटी के सदर राजेंद्र सिंह ने कहा कि ड्राफ्ट पर तकरीबन मंजूरी बन गई है। ज़्यादातर मुद्दों पर बहस हो चुकी है। कुछ और मौजू पर बात करनी है। 11 जून को फिर बैठक होगी। उसी दिन ड्राफ्ट को फाइनल कर सीएम के पास भेज दिया जाएगा।

असल बाशिंदों को किया जाएगा प्रोटेक्ट : बंधु

टीएमसी एमएलए और ड्राफ्ट कमेटी के मेम्बर बंधु तिर्की ने कहा कि असल बाशिंदों को ज्यादा से ज्यादा कैसे प्रोटेक्ट किया जाए, इस पर बहस हुई। मसौदा कमेटी के मेंबरों के दरमियान कई नुकातों पर मंजूरी बन गई है।

बैठक में कौन कौन थे शामिल

बैठक में तालीम वज़ीर गीताश्री उरांव, शहर तरक़्क़ी वज़ीर सुरेश पासवान, एमएलए सरफराज अहमद, बंधु तिर्की, लोबिन हेंब्रम, संजय कुमार सिंह यादव वगैरह थे। कैबिनेट सेक्रेटरी जेवी तुबिद और एसके सत्पथी भी थे।

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