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झारखंड : डायन और जादू-टोना के बारे में स्कूल में पढ़ेंगे बच्चे

झारखंड में डायन और जादू-टोना के नाम पर होने वाली प्रताड़नाओं के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए सरकारी स्कूलों में इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा.
स्कूली शिक्षा और साक्षरता सचिव अराधना पटनायक बताती हैं कि छठवीं से आठवीं तक के बच्चों की पढ़ाई में इस विषय को शामिल किया जा रहा है. इसका ड्राफ्ट भी तैयार है. अक्सर गांव के स्कूलों में जाकर पढ़ाने वाली अराधना पटनायक कहती हैं, “ख्याल ये है कि बच्चे गांवों में निरक्षर बड़े-बूढ़ों को समझा पाएंगे कि ये महज कुरुतियां हैं और ख़ुद भी इन बातों पर यकीन नहीं करेंगे.

झारखंड हाइकोर्ट ने इन मामलों में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू की है. सितंबर 2015 से इस साल के मई तक नौ महीनों में जादू-टोना और डायन के नाम पर प्रताड़ना के 524 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 35 लोगों की हत्या कर दी गई है. साढ़े पांच साल के दौरान इन आरोपों में प्रताड़ना के करीब 3,300 मामले दर्ज हुए हैं और इन घटनाओं का सबसे ज्यादा ख़ामियाज़ा आदिवासी परिवारों ने भुगता है. पिछले साल आठ अगस्त को मांडर थाना के कंजिया गांव में डायन के शक में ही पांच आदिवासी महिलाओं की हत्या कर दी गई थी. परतो उरांव सरायकेला में पुलिस की नौकरी करते हैं. उनकी मां रतिया उरांइन और बहन तेतरी उराइंन भी उस घटना में मारी गई थीं.

समाज कल्याण विभाग के सचिव एमएस भाटिया के मुताबिक़, डायन प्रथा निषेध अधिनियम 2002 के मॉनटरिंग और सख्ती से कार्यान्वयन के लिए विधिक सेवा प्राधिकार तथा उनके विभाग में उपसचिव, नोडल अफसर होंगे. सारे जिलों के पुलिस अफसरों को कई निर्देश भेजे गए हैं, जिसमें इस पर जोर है कि जिन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है, या हत्या करने के लिए सहमति बन रही है, ऐसे में समय रहते पुलिस तत्काल कार्रवाई करें.

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