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झारखंड ने मांगा है 1140.77 करोड़ रुपये का राहत पैकेज

रांची : रियासत में सूखे से मुतासिर इलाके का जायजा लेने के लिए मर्कज़ी टीम जुमा को रांची पहुंची। जिराअत वूजरा के एडिशनल सेक्रेटरी जलज श्रीवास्तव की कियादत में नौ मेंबर टीम दो दिनों तक झारखंड में सूखे की जायज़ लेगी। पहले रियासती हुकूमत उनको अदाद व शुमार में रियासत की सूरते हाल से जानकारी करायेगी। उसके बाद टीम झारखंड का दौरा करेगी।

रियासती हुकूमत ने उनको असर वाले जिलों और ब्लाक की फेहरिस्त दस्तयाब करा दी है। इसके बाद टीम दौरे का फैसला लेगी। भारत सरकार की टीम के साथ जीराअत, जानवर पालन, मछली पालन, देहि तरक्क्की, शहर तरक्क्की, पिने के पानी व सफाई, पानी वसायल महकमा के अफसर भी जायेंगे।

रियासत के 122 ब्लाक में धान की फसल में 40 फीसद से ज्यादा नुकसान हुआ है। वज़ीरे आला के हुक्म के बाद तमाम जिलों में जिला सतही टॉस्क फोर्स की तशकील किया गया था। कैबिनेट के सिफारिश के बाद मर्क़ज़ी ज़राअत वुजरा को मेमोरंडम सौंपा गया है। इसके बाद भारत सरकार ने मर्कज़ी टीम भेजी है। मेमोरंडम में रियासती हुकूमत ने भारत सरकार से 1140.77 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की मुतालिबात की है

मर्क़ज़ की रिपोर्ट के मुताबिक चतरा, देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, पाकुड़, पू सिंहभूम, साहेबगंज, सरायकेला जिले में हालत आम है। बोकारो, धनबाद, गढ़वा, गुमला, हजारीबाग, जामताड़ा, खूंटी, रामगढ़, लातेहार, लोहरदगा, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम, रामगढ़, रांची, सिमडेगा में सूखे का असर है। रियासत करीब-करीब हर साल सूखा झेल रहा है। लोगों को राहत नहीं मिल रही है। 2001-02 में 11, 2003-04 में 22, 2004-05 में 15, 2005-06 में 22, 2008-09 में चार जिला सूखे की चपेट में था। 2009-10 तथा 2014-15 में पूरा झारखंड सूखे की चपेट में है। इस बार खरीफ मौसम में करीब 829 मिमी बारिश हुई, जबकि झारखंड रियासत की औसत बारिश 1027 मिमी है।

जिला व ब्लाक, जहां 40 फीसद से ज्यादा धान की फसल मुतासिर हुई

सरायकेला : कुकरु, नीमडीह, गोविंदपुर, ईचागढ़, चांडिल, सरायकेला, खरसांवा, रामगढ़ : गोला, रामगढ़, मांडू, पतरातू, चितरपुर, दुलमी, लोहरदगा : किस्को, पेसरार, कुडू, सेन्हा, भंडरा. पूर्वी सिंहभूम : गोलमुरी, पटमदा, पोटरा, बोराम, धालभूमगढ़, घाटशिला, मुसाबनी, डुमरिया, बहरामगढ़, गुड़ाबांधा. चतरा : चतरा, हंटरगंज, लावालौंग, इटखोरी, गिद्धौर, पत्थलगढ़ा, सिमरिया, टंडवा. पलामू : मोहमदगंज, नवडीहा बाजार, पांडू, हैदरनगर, छत्तरपुर, विश्रामपुर, लेस्लीगंज, चैनपुर, रामगढ, पांकी, मेदनीनगर, ऊंटारी रोड. रांची : अनगड़ा, बेड़ो, बुंडू, लापुंग, नामकुम, ओरमांझी, रातू, सिल्ली, इटकी, नगड़ी, राहे. खूंटी : खूंटी, मुरहू, अरकी, कर्रा, तोरपा, रनिया. जामताड़ा : कुंडहित, नाला, करमाटांड़. हजारीबाग : बरही, बरकट्टा, चौपारण, इचाक, चुरचू, चलकुशा, दाड़ी, दारू, कटकम डाग, कटकम सांडी, केरेडारी, पदमा, सदर. पश्चिमी सिंहभूम : झींकपानी, टोंटो, मनझरी, तांतनगर, हाटगम्हिरया, चक्रधरपुर, बंदगांव, गोइलकेरा, सोनुआ, मनोहपुर, आनंदपुर, गुदड़ी, जगनाथपुर, नोआमुंडी, मंझगांव, कुमारडुगी. बोकारो : पेटरवार. गढ़वा : चिनिया, खरौंधी, कांडी, मेराल, रंका, केतार, बरडीहा, गढ़वा, रमकंडा, केतार, गढ़वा, भंडरिया, नगर उंटारी, मझिआंव, डंडा, नगर ऊंटारी, विशनुपुरा, बड़गड़, रमना, डंडई. गिरिडीह : डुमरी. धनबाद : तोपचांची, बाघमारा, बलियापुर, निरसा, धनबाद, कलियासोल, एगारकुंड. देवघर : मारगोमुंडा, सोनाराढांडी, करौ.

सूखा से निबटने के लिए रियासती हुकूमत को कम से कम दो हजार करोड़ रुपये फ़ौरन चाहिए। पूरे रियासत की सूरते हाल ठीक नहीं है। कम से कम 300 करोड़ रुपये डीजल सब्सिडी के लिए चाहिए। 40-50 करोड़ रुपये शहरी इलाके में जरूरत होंगे। 100 करोड़ रुपये सेहत, 250 करोड़ पिने के पानी में , 50 करोड़ जानवरों के चारा और कम से कम 1200 करोड़ रुपये छोटे और बड़े आबपाशी मंसूबा के लिए चाहिए। तभी इस रियासत को सूखा से राहत मिल सकती है।
राधाकृष्ण किशोर, MLA , छत्तरपुर

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