Tuesday , December 12 2017

झारखंड ने मांगा 22 हजार करोड़

रियासत हुकूमत ने इतवार को मंसूबा कमीशन से 22,000 करोड़ रुपये के खुसुशी पैकेज की मुताल्बा की। मंसूबा कमीशन के मेम्बर व अफसरों के साथ हुई बैठक में इनफ्रास्ट्रक्चर तामीर मामले में मर्कज़ से मदद नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। फॉरेस्ट क्लीय

रियासत हुकूमत ने इतवार को मंसूबा कमीशन से 22,000 करोड़ रुपये के खुसुशी पैकेज की मुताल्बा की। मंसूबा कमीशन के मेम्बर व अफसरों के साथ हुई बैठक में इनफ्रास्ट्रक्चर तामीर मामले में मर्कज़ से मदद नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए झारखंड में मुक़ामी दफ्तर खोलने की मुताल्बात की। मंसूबा कमीशन के मेम्बर के कस्तूरीरंगन ने कहा कि रियासत हुकूमत इन तमाम नुक्तों पर रिपोर्ट तैयार कर कमीशन को भेजे। कमीशन इस पर संजीदगी से गौर करेगा।
मर्कज़ से नहीं मिले पैसे : बैठक में रियासत हुकूमत ने कहा कि मर्कज़ स्पोंसर मंसूबों में रकम की कटौती से मंसूबा आकार कम करना पड़ रहा है। 2013-14 माली साल के दौरान रियासत को मर्कज़ से आठ हजार करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन 3,500 करोड़ रुपये कम दिये गये। मर्कज़ी हुकूमत ने सर्व शिक्षा अभियान के लिए 13वें माली कमीशन की सिफ़ारिश 359 करोड़ रुपये में से एक भी रुपया झारखंड को नहीं दिया। आइएपी में 510 करोड़ के बदले सिर्फ 170 करोड़ रुपये ही मर्कज़ ने दिये। बीआरजीएफ में 440 करोड़ के बदले सिर्फ 40 करोड़ रुपये मर्कज़ी हुकूमत से मिले।

रेल प्रोजेक्ट अब तक अधूरी : बैठक में नयी रेल प्रोजेक्ट का मुद्दा उठाया गया। कहा कि रियासत तशकील के बाद छह नयी रेल प्रोजेक्ट के तामीर की जरूरत बतायी गयी थी। उस वक़्त रेलवे वूजरा ने इक़्तेसादी तंगी की बात कही थी। रियासती हुकूमत ने इन प्रोजेक्ट में इक़्तेसादी मदद की पेशकश की थी। इसी के मुताबिक रियासत हुकूमत अब तक रेलवे को 2300 करोड़ रुपये दे चुकी है। बावजूद इसके मंसूबा पूरी नहीं की जा सकी हैं, जबकि पांच साल में काम पूरा करने का हदफ़ रखा गया था। अब रेल वूजरा हर साल मंसूबा की लागत बढ़ने की बात कर इजाफ़ी रकम की मुताल्बा करता है। क़ौमी सड़कों के मामले में भी यही रवैया अपनाया गया है।

रांची-टाटा एनएच का काम धीमा : बैठक में रांची-जमशेदपुर नेशनल हाइवे की चर्चा करते हुए रियासत हुकूमत की तरफ से कहा गया कि सड़क तामीर का काम भी धीमी रफ्तार से चल रहा है। इस मुद्दत में ठेकेदार को सड़क को चलने लायक बनाये रखना है, लेकिन सड़क की हालत चलने के लायक (मोटरेबुल) नहीं है। इस सिलसिले में क़ौमी सड़क अथॉरिटी समेत ठेकेदार से भी राब्ता किया गया, लेकिन कोई हल नहीं निकला। बैठक में कहा गया कि रियासत हुकूमत एशियन डेवलपमेंट बैंक से कर्ज लेकर गोविंदपुर-साहेबगंज सड़क बनवा रही है। इस सड़क पर गंगा नदी में पुल की जरूरत है। रियासत हुकूमत ने इसके लिए कई बार मर्कज़ से दरख्वास्त किया, लेकिन टाल-मटोल की पॉलिसी अपनायी जा रही है।

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