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टेलीकॉम सेक्टर में अधिग्रहण और विलय से भारत में खत्म हो रही है नौकरियोयां

नई दिल्ली। एसएमएस अब कोई भेजता नहीं. कॉल भी इंटरनेट से हो रही है. डाटा मुफ्त मिल रहा है. ऐसे में टेलिकॉम कंपनियां कैसे खुद को बचा पाएंगी. हजारों नौकरियां खत्म हो चुकी हैं और यह सिलसिला रूकने वाला नहीं है.

जबरदस्त होड़, विलय और अधिग्रहण की वजह से भारत में टेलिकॉम क्षेत्र लगातार सिकुड़ रहा है. इससे ग्राहकों की तो पौ-बारह है लेकिन इस क्षेत्र में नौकरियों में लगातार कटौती हो रही है. बीते एक साल में इस क्षेत्र में एक-चौथाई नौकरियां कम हुई हैं.

दूसरी ओर, ग्राहकों को पहले के मुकाबले बेहद कम कीमत पर डाटा और लगभग मुफ्त में फोन की सुविधा मिल रही है. खासकर बीते साल रिलायंस जियो के मैदान में उतरने के बाद इस क्षेत्र में परिदृश्य तेजी से बदला है.

दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस क्षेत्र में कुल खर्च का लगभग पांच फीसदी वेतन-भत्तों पर खर्च होता है. बीते कुछ वर्षों के दौरान इस क्षेत्र में वेतन आसमान छूने लगा था.

लेकिन तब फोन की दरों और डाटा की कीमतों के भी आसमान छूने की वजह से दूरसंचार कंपनियां दोनों हाथों से माल बटोर रही थीं. बीते साल रिलायंस जियो के मैदान में उतरने और फोन व डाटा की मुफ्त सुविधा देने के बाद दूसरी कंपनियों को भी अपनी दरों में कटौती पर मजबूर होना पड़ा. इससे उनके मुनाफे में गिरावट आई और तमाम कंपनियां खर्चों में कटौती के उपाय तलाशने लगी.

इस मामले में पहली गाज कर्मचारियों पर ही गिरी. दरों में कटौती की वजह से एयरटेल का मुनाफा वर्ष 2016-17 की आखिरी तिमाही में 72 फीसदी की गिरावट के साथ 373.4 करोड़ रुपये पर आ गया.

इसी तरह वोडाफोन के संचालन मुनाफे में 10 फीसदी की गिरावट आई. वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान उद्योग का राजस्व पहली बार गिरकर 1.88 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. चालू वित्त वर्ष के दौरान इसमें और गिरावट का अंदेशा है.मुनाफा घटने की वजह से कंपनियों के विलय व अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेज हुई है.

मोटे अनुमान के मुताबिक, इस क्षेत्र में काम करने वाले लगभग तीन लाख कर्मचारियों में से बीते साल भर के दौरान 75 हजार लोगों की नौकरियां चली गईं. उनको या तो निकाल दिया गया या फिर करियर को ध्यान में रखते हुए वह खुद छोड़ कर चले गए.

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