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टॉपर घोटाला : बच्चा की डायरी में मंत्री-विधायकों के नाम

टॉपर घोटाले में आरोपित विशुन राय कॉलेज का प्राचार्य अमित उर्फ बच्चा राय एक बड़ा सिंडिकेट चला रहा था। इस सिंडिकेट में दो दर्जन से अधिक राजनेता भी शामिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, न केवल राज्य के नेता, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने भी बच्चा राय की काली कमाई में अपना हिस्सा बनाया था।

इसका पूरा खुलासा बच्चा राय के एक करीबी ने किया है, जिसे टॉपर घोटाले में जेल भेजा गया है। पुलिस को कुछ दस्तावेज और एक डायरी हाथ लगी है जिसमें कई वीआईपी का नाम संक्षेप में मोबाइल नंबर के साथ लिखा है।

लाल डायरी की हो रही तलाश: पुलिस को एक और लाल रंग की डायरी की तलाश है जिसे बच्चा अपने साथ गाड़ी में लेकर सिंडिकेट से जुड़े लोगों से मिलता था। उस डायरी में उसका सारा लेखा जोखा था। अभी उसके बिजनेस का हिसाब कॉलेज कमेटी में बने परिवार के छह सदस्य व उसका भाई संभाल रहे हैं।

उत्तर बिहार में अरबों की जमीन: बच्चा राय के घर से मिले जमीन के कागजात की जांच में पुलिस को पता चला है कि उत्तर बिहार, समेत प्रदेश के कई जिलों में उसके और उसके परिवार के नाम पर कई एकड़ जमीन है। उसकी कीमत अरबों में आंकी जा रही है।

बच्चा राय के कॉलेज से मिले दस्तावेज से यह बात सामने आई है कि वह छात्रों को पास कराने और परीक्षा में चोरी करने की पूरी छूट देने का लालच देता था। इसके बाद वह निजी कॉलेजों के बच्चों का फार्म अपने यहां से भरवाता था। दूसरे कॉलेज का ठेका लेकर सेंटर अपने यहां मंगवाता था।

बिहार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद व उनकी पत्नी उषा सिन्हा का अब तक सुराग नहीं मिला है। दोनों को दबोचने लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। इन दोनों के खिलाफ पुलिस को शुक्रवार की देर शाम कोर्ट से इश्तेहार चिपकाने का आदेश मिल गया है। शनिवार को पुलिस ने दोनों के घरों पर इश्तेहार चिपकाएगी। पुलिस ने गुरुवार को इन दोनों के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट को लौटा कर इश्तेहार का आवेदन दिया था। इश्तेहार चिपकाने के बावजूद दोनों पुलिस के सामने नहीं आते हैं तो इनके घर की कुर्की की जाएगी।

बच्चा ज्यादातर सिंडिकेट से जुड़े वीआईपी के निजी कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों का सेंटर लेता था। छात्रा के अच्छे नंबर आने व परीक्षा में पूरी छुट मिलने के बाद वह निजी कॉलेजों को टारगेट देकर अपने यहां से परीक्षा दिलवाता था। उसके कॉलेज में नालंदा, पटना, वैशाली, जहानाबाद, गोपालगंज, छपरा आदि के छात्र फॉर्म भरते थे।

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के माध्यमिक प्रभाग के स्थापना प्रशाखा पदाधिकारी बिपिन कुमार को गलत जानकारी देने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने बताया कि चपरासी व ऑपरेटर संवर्ग की संख्या में जो भिन्नता आई थी, वह प्रशाखा पदाधिकारी के गलती से हुआ था। इसी कारण से बिपिन कुमार को निलंबित कर दिया गया है।

टॉपर घोटाला के बाद सुर्खियों में आए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद ने नवादा में भी करीब एक दर्जन स्कूलों को कोड उपलब्ध कराया है।

इन स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी व छात्रों की उपस्थिति नगण्य रहने के बाद भी कोड उपलब्ध कराए गए। हिन्दुस्तान की पड़ताल में पता चला है कि कोड का उपयोग इन स्कूलों की ओर से मैट्रिक व इंटर के परीक्षा फॉर्म भराने के लिए किया जाता रहा है। इस साल नौंवीं की परीक्षा को लेकर छात्र-छात्राओं की जो संख्या विभाग की ओर से जारी की गई थी। उसमें यह संख्या 45 हजार बताई गई थी। पर दसवीं के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले छात्रों की संख्या 35 हजार पर ही सिमट गई। एकाएक 10 हजार से अधिक विद्यार्थी कम गए।

इस सच्चाई के सामने आने के बाद विभाग की ओर से कोई संबंधित स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। हर साल इन स्कूलों से प्राइवेट रूप में जिले ही नहीं दूसरे जिले व राज्य के छात्रों का मैट्रिक में रजिस्ट्रेशन कराकर फॉर्म भरवाने का धंधा बेखौफ जारी है। नवादा शहर में एक, वारिसलीगंज में दो, काशीचक में दो, नारदीगंज में दो, सिरदला में दो, हिसुआ में दो, रजौली में दो तथा अकबरपुर प्रखंड में ऐसे एक स्कूल चल रहे हैं। विभागीय अधिकारी गोरख प्रसाद ने बताया कि प्राइवेट इंटर स्कूलों की जांच की जानी है।

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