ट्रेनों के तत्‍काल टिकट में CBI ने किया हाइटेक घोटाले का पर्दाफाश

ट्रेनों के तत्‍काल टिकट में CBI ने किया हाइटेक घोटाले का पर्दाफाश
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नई दिल्ली : ट्रेनों के लिए तत्‍काल टिकट मिलने में हो रही असुविधा के पीछे बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। सॉफ्टवेयर के सहारे तत्काल टिकटों की एक साथ बुकिंग के कारण मिनटों में टिकट खत्म हो जाया करते थे। हैरानी की बात यह है कि यह सॉफ्टवेयर भी सीबीआइ के ही असिस्टेंट प्रोग्रामर अजय गर्ग ने बनाया था। वैसे सीबीआइ ने अपने इस प्रोग्रामर को गिरफ्तार कर लिया है।

सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अजय गर्ग के बनाए सॉफ्टवेयर को बुकिंग एजेंटों तक जौनपुर के अनिल कुमार गुप्ता नाम का आदमी पहुंचाता था। एजेंटों को अजय गर्ग के बारे में कोई जानकारी नहीं होती थी। एक बार सॉफ्टवेयर मिलने के बाद बुकिंग एजेंट एक साथ सैंकड़ों तत्काल बुक कर सकता था और इसके लिए आम लोगों से अधिक कीमत वसूलता था। तत्काल टिकट से होने वाली अतिरिक्त कमाई का एक हिस्सा अनिल कुमार गुप्ता के पास जाता था, जो बाद में अजय गर्ग तक उसका हिस्सा पहुंचा देता था।

इस हाईटेक घोटाले में सॉफ्टवेयर के मार्फत ही अजय गर्ग एक-एक टिकट की जानकारी रखता था और उसी के हिसाब से अपना कमीशन लेता था।

सीबीआइ को अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक अजय गर्ग का यह खेल पिछले एक साल से जारी था। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यूपीएससी के मार्फत सीबीआइ में आने के पहले अजय गर्ग आइआरसीटीसी में प्रोग्रामर था। आइआरसीटीसी में 2007 से 2011 के बीच नौकरी करते हुए उसने उसकी वेबसाइट की खामियों को पहचाना और नया सॉफ्टवेयर बनाकर उसे कमाई की साजिश में जुट गया।

एफआइआर दर्ज करने के साथ ही सीबीआइ अजय गर्ग और अनिल कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। अजय गर्ग को साकेत की विशेष अदालत ने पांच दिन के लिए सीबीआइ की रिमांड पर भेज दिया है, जहां उससे पूछताछ हो रही है। वहीं जौनपुर में गिरफ्तार किये गए अनिल कुमार गुप्ता को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया जा रहा है।

गिरफ्तारी के साथ ही सीबीआइ ने सबूत जुटाने के लिए दिल्ली, मुंबई और जौनपुर में 14 स्थानों पर छापा मारा। छापे में 89 लाख रुपये नकद, 61 लाख रुपये सोने की ज्वेलरी, 15 हार्डडिस्क, 52 मोबाइल फोन, 24 सिम कार्ड 10 नोटबुक, छह रॉउटर, चार डोंगल, 19 पेन ड्राइव और अन्य दस्तावेज बरामद किया गया है।

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