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डाक्टर सय्यदना मुहम्मद बुरहान उद्दीन की 101वीं सालगिरा

हैदराबाद ।१० मार्च :दाऊदी फ़िर्क़ा बवाहीर के रुहानी पेशवा डाक्टर सय्यदना मुहम्मद बुरहान उद्दीन का 101 वीं यौम-ए-पैदाइश दुनिया भर में इंतिहाई जोश-ओ-ख़ुरोश के साथ 13मार्च को मनाया जाएगा। सय्यदना बुरहान उद्दीन फ़िर्क़ा बवाहीर के 52वें

हैदराबाद ।१० मार्च :दाऊदी फ़िर्क़ा बवाहीर के रुहानी पेशवा डाक्टर सय्यदना मुहम्मद बुरहान उद्दीन का 101 वीं यौम-ए-पैदाइश दुनिया भर में इंतिहाई जोश-ओ-ख़ुरोश के साथ 13मार्च को मनाया जाएगा। सय्यदना बुरहान उद्दीन फ़िर्क़ा बवाहीर के 52वें दाई मुतलक़ हैं। आप 6मार्च 1915 मुताबिक़ 20रबी एलिसानी 1333हक़ो गुजरात के शहर सूरत में पैदा हुई। 19साल की उम्र में उन्हें आप के वालिद डाक्टर ताहिर सैफ उद्दीन ने अपनी हयात ही में अपना जांनशीन मुक़र्रर कर दिया था।

21बरस की उम्र में उन्हों नेक़ुरआन का हिफ़्ज़ मुकम्मल करलिया और डाक्टर ताहिर सैफ उद्दीन के इंतिक़ाल के बाद 53बरस की उम्र में उन्हों ने दाई मुतलक़ की हैसियत से अपनी ख़िदमात का आग़ाज़ किया। डाक्टर सय्यदना बुरहान उद्दीन ने अलजामाৃ अलसीफ़ीৃ के निसाब को आलमी मयार के इस्लामी जमिआत के मुताबिक़ तैय्यार किया। यहां 11साल तक इकतिसाब-ए-इलम के बाद फ़ारग़ीन को मुख़्तलिफ़ मुक़ामात पर सय्यदना का नुमाइंदा का आमिल मुक़र्रर किया जाता है जिस केलिए हाफ़िज़-ए-क़ुरआन होना ज़रूरी ही। सय्यदना ने अपने फ़िर्क़ा के मर्द-ओ-ख़वातीन केलिए मज़हबी और असरी तालीम लाज़िमी क़रार दिया। चुनांचे फ़िर्क़ा बवाहीर मैं ख़वांदगी सद फ़ीसद हैं।।

डाक्टर सय्यदना बुरहान उद्दीन का दौर फ़िर्क़ा बवाहीर की मिसालीतरक़्क़ी का दौर समझा जाता ही। जबकि पूरा मुआशरा बलासू दी कारोबार करता ही। सय्यदना ने इस्लामी फ़न तामीर के अहया और फ़रोग़ केलिए बेमिसाल ख़िदमात अंजाम दें। दुनिया भर में उन्हों ने मसाजिद तामीर करवाई और क़दीम मसाजिद की अज़ सरनू तामीरमुकम्मल करवाई। डाक्टर सय्यदना मुहम्मद बुरहान उद्दीन को जामि अज़हर ने इस्लामी साईंस में डाक्टरेट की डिग्री से नवाज़ा।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी ने डाक्टर आफ़थयालोजी की डिग्री अता की। अहल अलबीत यूनीवर्सिटी कर्बला की जानिब से शहादततक़दीर की डिग्री अता की गई। हुकूमत अरदन की जानिब से सितारा-ए-अरदन का एज़ाज़अता किया गया और सदर मिस्र की जानिब से भी सब से बावक़ार एज़ाज़ दिया गया। उन्हें अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के चांसलर की हैसियत से ख़िदमात अंजाम देने का एज़ाज़ हासिल हैं।। कई योरोपी ममालिक ने उन्हें एज़ाज़ी शहरीयत पेश की।

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