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डावर किशन देने का फ़ैसला सूदमंद साबित नहीं हुआ:असरानी

अपने वक़्त के मशहूर कॉमेडियन और आज भी फिल्मों में मसरूफ़ रहने वाले असरानी ने बताया कि फ़िल्मी सनअत में उन्होंने बहुत तवीलइंनिग मुकम्मल की है जो यक़ीनन किसी कारनामे से कम नहीं। उन्होंने कहा कि उनके सामने कितने नए हीरो आए और चले गए ले

अपने वक़्त के मशहूर कॉमेडियन और आज भी फिल्मों में मसरूफ़ रहने वाले असरानी ने बताया कि फ़िल्मी सनअत में उन्होंने बहुत तवीलइंनिग मुकम्मल की है जो यक़ीनन किसी कारनामे से कम नहीं। उन्होंने कहा कि उनके सामने कितने नए हीरो आए और चले गए लेकिन वो आज भी अपनी जगह बनाए हुए हैं।

इस सिलसिले में जहां तक फीमेल स्टार का सवाल है तो उन्होंने फ़रीदा जलाल का नाम लिया और कहा कि फ़रीदा भी 60 की दहाई से फ़िल्मी दुनिया में क़दम जमाए हुए हैं और वो आज भी फिल्मों और टी वी सीरियलों में मसरूफ़ हैं। असरानी ने बताया कि उन्होंने फ़रीदा जलाल की पहली फ़िल्म तक़दीर बड़ी मुश्किल से फुट जमा करके देखी थी जो बहैसियत हीरो भारत भूषण की आख़िरी फ़िल्म साबित हुई थी क्योंकि इस के बाद उन्होंने कैरेक्टर रोल्ज़ करने शुरू करदिए थे।

असरानी से जब पूछा गया कि उन्होंने जो दो फिल्में डायरेक्ट कीं पहली चला मुरारी हीरो बनने और दूसरी हम नहीं सुधरेंगे इस का तजुर्बा कैसा रहा तो असरानी ने जवाब दिया कि डायरेक्शन के मैदान में उतरने का उनका फ़ैसला शायदसूदमंद साबित नहीं हुआ। चला मुरारी हीरो बनने, का सब्जेक्ट अच्छा था और फ़िल्म ने अच्छा ख़ासा बिज़नस भी किया था लेकिन हम नहीं सुधरेंगे को शायक़ीन ने शायद ये सोच कर मुस्तर्द कर दिया कि असरानी साहिब अब अपने शोले वाले रोल को कैश करना चाहते हैं।

असरानी ने कहा कि मौजूदा दौर में उन्हें रीतेश देशमुख की कामेडी पसंद आती है जबकि सुरेश मेनन भी अच्छा अदाकार है लेकिन उसे ख़ातिरख़वाह मौक़ा नहीं मिला।

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