डा. भीमराव अम्बेडकर का समतामूलक मानवतावादी भारतीय संविधान आज खतरे में है: मायावती

डा. भीमराव अम्बेडकर का समतामूलक मानवतावादी भारतीय संविधान आज खतरे में है: मायावती

नई दिल्ली: बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने कहा कि बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर का समतामूलक मानवतावादी भारतीय संविधान आज खतरे में जरूर है, परन्तु यह भी एक ऐतिहासिक सत्य है कि संविधान को उसकी सही मंशा के अनुसार लागू करके देश का व्यापक कल्याण करने के मामले में कांग्रेस किसी भी प्रकार से बीजेपी एण्ड कम्पनी से कम फेल नहीं रही है अर्थात संविधान के पवित्र उद्देश्यों को फेल साबित करने के मामले में बीजेपी व कांग्रेस ये दोनों ही चोर-चोर मौसेरे भाई हैं।

नवनियुक्त कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी के इस वक्तव्य पर कि “संविधान खतरे में है” अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये मायावती ने कहा कि यही सही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आर.एस.एस. की विघटनकारी व हिन्दुत्ववादी सोच वाली सरकार में देश का संविधान खतरें में है और यह बात बीजेपी एण्ड कम्पनी के लोग चाहे लाख नकारें परन्तु यह सभी जानते है कि आरएसएस की सोच संविधान व भारतीय तिरंगा विरोधी रही है। ये लोग मुँह में राम बगल में छुरी की तरह संविधान की शपथ लेकर सरकार में तो आ गये है, लेकिन इस संविधान की आड़ में अपनी घोर कट्टरवारी व जातिवादी सोच के मुताबिक लागू करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं यही कारण है कि आज देश की हर संवैधानिक व लोकतांत्रिक संस्थायें यहाँ तक कि संसद, न्यायपालिका व कार्यपालिका सभी एक अभूतपूर्व संकट व तनाव के दौर से गुजर रही हैं।

लेकिन दूसरी तरफ यह भी एक ऐतिहासिक सत्य ही है कि बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर ने देश के आजादी के बाद अर्थात राजनीतिक लोकतंत्र प्राप्त करने के बाद जिस सामाजिक व आर्थिक लोकतंत्र का मानवतावादी सपना देखा था, वह कांग्रेस के लम्बे शासनकाल के दौरान बिखरता चला गया। छुआ-छात जातीयता, जातिवादी हिंसा, व भेदभाव संविधान में तो समाप्त कर दिया गया, परन्तु सत्ता वर्ग के लोग इसको हर स्तर पर संरक्षण ही देते रहे। साथ ही अन्य पिछड़े वर्ग को उसका हक देने के मामले में काफी ज्यादा भेदभाव बढ़ता गया। यही कारण है कि आजादी के काफी लम्बे समय के बाद ही गैर कांगे्रस सरकार ने बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर को “भारत रत्न” से सम्मानित किया जा सका तथा ओ.बी.सी. वर्ग को शिक्षा व नौकरी के क्षेत्र में आरक्षण की व्यवस्था की जा सकी। कांग्रेस को यह बात भी देश को बतानी चाहिए कि बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर ने सन् 1951 में देश के पहले कानून मंत्री के पद से इस्तीफा क्यों दिया था?

कांग्रेस पार्टी की इस प्रकार की अनेकों संवैधानिक हित व कल्याण की पवित्र भावना के विपरीत काम करते रहने के कारण ही फिर मजबूर होकर “बहुजन समाज”  के अपने अधिकार की लड़ाई लड़ने के लिए अन्ततः 14 अप्रैल सन् 1984 को बी.एस.पी. की स्थापना करनी पड़ी थी।

मायावती ने कहा कि बीजेपी/आरएसएस एण्ड कम्पनी अगर आज खुलेआम संविधान की अवमानना करके देश के इतिहास में काला अध्याय जोड़ रहे है, परन्तु कांग्रेस का भी दामन कम दागदार नहीं है। बीएसपी बाबा साहब डा. अम्बेडकर के पवित्र संविधान की रक्षा में अपना जी-जान ही नहीं बल्कि अपना सब कुछ कुर्बान कर देगी, लेकिन कांग्रेस पार्टी किस नैतिक आधार पर बीजेपी की संविधान विरोधी सोच से मजबूती से लडे़गी, यह देखने वाली बात होगी।

जहाँ तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार की संविधान को तिरंगा के बजाय भगवा रूप देने की बात है तो इससे डटकर लोहा लेने की क्षमता देश के सवा सौ करोड़ आमजनता खासकर देश के करोड़ों गरीबों, दलितों, पिछड़ों व धार्मिक अल्पसंख्यकों में है जिनकी भलाई के लिए ही बाबा साहब डा. अम्बेडकर ने दिन-रात अटूट मेहनत करके इस अनुपम संविधान का निर्माण किया था और जिसका अनुसरण करने की कोशिश दूसरे देश करते हैं। बीजेपी/आरएसएस की संविधान विरोधी घातक व घृणित सोंच आमजनता कभी सफल नहीं होने देगी और बीएसपी उन सबकी अगुवाई पहले भी करती रही है, आज भी कर रही है और आने वाले कल में भी इसका नेतृत्व करने की पूरे जी-जान से तैयार है।

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