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डिजिटलाइजेशन से विश्वविद्यालय के कामकाज में आयेगी पारदर्शिता: सुशील कुमार मोदी

पटना: बिहार के उपमुख्‍यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने राजधानी पटना के ए एन सिन्‍हा इंस्‍टीट्यूट में मगध विश्वविद्यालय द्वारा विश्वविद्यालय कार्यों को डिजिटल रूप में बदलने और ई-गवर्नेंस पथ पर ले जाने के लिए महत्वाकांक्षी डिजिटल विश्वविद्यालय परियोजना की विधिवत शुरूआत की। इस दौरान श्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मगध विश्वविद्यालय, बिहार का पहला ऐसा विश्वविद्यालय जिसने अपने दम पर ई – प्रोजेक्‍ट लांच किया है। इसके जरिये विश्वविद्यालय में नामांकन से लेकर विश्वविद्यालय संबंधी रिकॉर्डस तक को डिजिटलाइजेशन कर दिया गया है। इससे जहां छात्रों को सुविधाएं मिलेंगी, वहीं विश्वविद्यालय के कामकाज में पारदर्शिता भी आयेगी। मगध विश्वविद्यालय डिजिटलाइजेशन के क्षेत्र में अन्‍य विवि के लिए प्रेरणा का काम कर रही है।

उपमुख्‍यमंत्री ने कहा कि जब राज्‍य का एक कॉलेज अपने दम पर विश्वविद्यालय को डिजिटलाइज्‍ड कर सकता है, तो राज्‍य के बांकी विश्वविद्यालय क्‍यों नहीं। इसको लेकर हमने राजभवन में महामहिम राज्‍यपाल से भी बात की। वहां ये तय हुआ कि मगध विश्वविद्यालय ने जो शैक्षणिक गतिविधियों को डिजिटलाइज्‍ड कर जो रास्‍ता दिखाया है, उसके अनुसार आगामी सत्र में कम से कम सभी विवि में नामांकन की क्रिया ऑनलाइन संभव हो सके। इसकी जिम्‍मेवारी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को दी गई। साथ ही बीएसईबी को मगध विवि से समन्‍वय बनाने की भी बात कही है, ताकि उनके डिजीटाइजेशन अनुभवों को फायदा मिले।

श्री मोदी ने भारत सरकार के डिजी लॉकर का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक ऐसी सुविधा है, जहां छात्र बिना किसी शुल्‍क के अपने सभी सर्टिफिकेट डिजी लॉकर में रख सकते हैं। यह बैंक लॉकर जैसा कंसेप्‍ट है, जहां डिजी लॉकर को छात्र खुद एक्‍सेस कर पायेंगे। उपमुख्‍यमंत्री ने शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिल पाने पर चिंता जताई और कहा कि हम कोशिश कर रहे हैं कि अगले वित्तीय वर्ष के बिहार के सभी विवि के शिक्षकों का वेतन नियमत हो जाये, ताकि राज्‍य के विवि का शैक्षणिक माहौल बेहतर हो सके। साथ ही उनकी नियुक्ति के लिए राज्‍य सरकार ने एक अलग से आयोग बनाया है, ताकि विवि में शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया आसान हो।

उन्‍होंने कहा कि पहले विवि शिक्षकों की बहाली बिहार लोक सेवा आयोग के जरिये होती थी, मगर अब इसके लिए राज्‍य सरकार ने विश्वविद्यालय आयोग बनाया है। साथ ही उपमुख्‍यमंत्री ने राज्‍य के विश्वविद्यालयों में रेगुलर विषयों की कक्षा में छात्रों के अटेंडेंस को लेकर भी चिंता जाहिर की और सभी विवि के प्रचार्यों से अपील की कि वे अपने करिकुलम को नये सिरे से डिजाइन करें और वर्तमान की आवश्‍यकताओं के अनुसार जॉब ओरिएंटेड कोर्सेस को प्राथमिकता दें।

वहीं, मगध विश्वविद्यालय  की डिजिटल विश्वविद्यालय परियोजना की शुभारंभ के दौरान वीसी प्रो. कमर हसन ने कहा कि यह विश्वविद्यालय की महत्‍वाकांक्षी परियोजना है, जिसका लाभ छात्रों के अलावा कॉलेज से जुडें सभी लोगों को मिलेगा और पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।। अब मगध विवि में इस परियोजना के जरिये ऑनलाइन छात्र आवेदन, छात्र चयन और ऑनलाइन प्रवेश के बारे में छात्रों के लिए इलेक्ट्रॉनिक संचार, परीक्षा के संचालन और परिणाम घोषित करने वाली क्रियाकलाप जैसे कॉलेजों, केंद्र आवंटन, हॉल टिकट पीढ़ी और विद्यार्थियों को ईमेल, परीक्षा उपस्थिति और मूल्यांकन से संबंधित, ऑनलाइन डिग्री सत्यापन, छात्रों द्वारा ऑनलाइन प्रमाणपत्र अनुरोध, छात्र शिकायतें और हेल्पडेस्क के लिए ऑनलाइन पोर्टल, छात्रों द्वारा ऑन-लाइन भुगतान हो सकेंगी।

डिजिटल विश्वविद्यालय परियोजना की शुभारंभ के दौरान प्रो-वीसी प्रो. के एन पासवान, पाटलिपुत्र विवि के वीसी प्रो. गुलाब चंद राम, मगध विवि के रजिस्‍ट्रार प्रो. शैलेश कुमार सिंह, नोडल ऑफिसर डिजिटल विवि प्रोजेक्‍ट मगध विवि डॉ शैलेंद्र कुमार सिंह, सीडीसी के सीनियर कंसलटेंट श्री एस के शर्मा, स्‍टू‍डेंट वेलफेयर के डीन डॉ. एस आर प्रसाद सिंह, डॉ एन के शास्‍त्री, श्री राजेश शर्मा समेत विभिन्‍न कॉलेजों के प्राचार्य और शिक्षक उपस्थित रहे।

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