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डीएसपी के क़त्ल में राजा भैया का हाथ नहीं!

लखनऊ, 03 अप्रैल: प्रतापगढ़ (यूपी) के कुंडा में डीएसपी जिया उल हक के क़त्ल के मामले में सीबीआई ने आज शुरूआती रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के मुताबिक इस कांड में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के हाथ के इशारे नहीं मिले हैं। सीबीआई की श

लखनऊ, 03 अप्रैल: प्रतापगढ़ (यूपी) के कुंडा में डीएसपी जिया उल हक के क़त्ल के मामले में सीबीआई ने आज शुरूआती रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के मुताबिक इस कांड में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के हाथ के इशारे नहीं मिले हैं। सीबीआई की शुरूआती (इब्तिदायी )रिपोर्ट कहती है कि इस क़त्ल में भीड़ के ही हाथ का अंदेशा है।

इससे पहले, कुंडा सर्किल के चारों थानों हथिगवां, कुंडा, नवाबगंज और महेशगंज के थानेदार समेत सभी पुलिस मुलाज़िमीन को आज हटाने के हुक्म जारी कर दिए गये। हुकूमत ने इलाहाबाद जोन के आइजी को जिम्मेदारी दी है कि सभी पुलिस मुलाज़िमीन को जोन के दूसरे सर्किल में तैनात कर उनकी जगह नये लोगों को भेजा जाय। डीजीपी की ओर से अपर पुलिस सुप्रीटेंडेंट आशा राम यादव के हटाये जाने का प्रोपोजल न मिल पाने की वजह से उनको हटाने का फैसला नहीं हो सका।

बुध के दिन एनेक्सी के मीडिया सेंटर में होम सेक्रेटरी आरएन उपाध्याय और पुलिस इंसपेक्टर जनरल नज्मो नस्क़ राजकुमार विश्वकर्मा ने सहाफियो को यह इत्तेला दी। यह पूछे जाने पर कि अभी कई थानेदार महज दस दिन के अंदर तैनात किये गये तो उनको हटाने का फैसला क्यों हुआ? आफीसरों का कहना था कि सीबीआइ एक खुसूसी जांच एजेंसी है, जिसका हम एहतिराम करते हैं और उनकी मंशा का एहतिराम करते हुए यह फैसला लिया गया है।

दो मार्च को प्रतापगढ़ के बलीपुर गांव में सीओ कुंडा जियाउल हक, ग्राम प्रधान नन्हें यादव और उनके भाई सुरेश यादव के क़त्ल की जांच कर रही सीबीआइ ने जांच में रोड़ा बन रहे पुलिस अहलकारो को हटाने के लिए हुकूमत को खत लिखा था।

सीबीआइ के खत के हवाले से होम सेक्रेटरी ने बताया कि सीबीआइ हेडक्वार्टर स्पेशल क्राइम जोन के ज्वाइंट डायरेक्टर आरएस भट्टी ने एएसपी समेत कुंडा सर्किल के पुलिसकर्मियों को हटाने के लिए 28 मार्च को डीजीपी और चीफ सेक्रेटरी को एक खत लिखा था।

तीस मार्च को यह खत चीफ सेक्रेटरी दाखिला को मिला। इसके बाद जरूरी कार्रवाई शुरू हुई। आफीसरो ने बताया कि हम सीबीआइ को जांच में मदद कर रहे हैं । अभी तक एएसपी को न हटाये जाने के सिलसिले में आफीसरो ने बताया कि कानपुर में इजलास होने की वजह से डीजीपी की ओर से करार नहीं मिला, जिससे यह फैसला नहीं हो सका। डीजीपी का करार मिलते ही एएसपी को वहां से हटाकर नई तैनाती की जायेगी।

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