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डीज़ल की क़ीमतों से कंट्रोल की जुज़वी बरख़ास्तगी का इफ़राते ज़र पर मामूली असर: हुकूमत

नई दिल्ली, 23 फ़रवरी: हुकूमत ने आज कहा कि डीज़ल की क़ीमतों से कंट्रोल की जुज़वी दस्तबरदारी से इफ़राते ज़र (मुदारिसफेति) पर मामूली असर होगा और आम आदमी ज़्यादा मुतास्सिर नहीं होगा।

नई दिल्ली, 23 फ़रवरी: हुकूमत ने आज कहा कि डीज़ल की क़ीमतों से कंट्रोल की जुज़वी दस्तबरदारी से इफ़राते ज़र (मुदारिसफेति) पर मामूली असर होगा और आम आदमी ज़्यादा मुतास्सिर नहीं होगा।

मुमलिकती वज़ीर फैनांस नमू नारायण मीना ने लोकसभा में आज तहरीरी जवाब देते हुए कहा, ‘चूँकि ये इज़ाफ़ा मामूली है, और चिल्लर फ़रोशी के ग्राहकों पर इस का ज़्यादा असर नहीं होगा ।

इफ़रातेज़र (मुद्रा स्फीति ) की शरह भी ज़्यादा मुतास्सिर नहीं होगी। हुकूमत ने गुज़िश्ता माह तेल कंपनियों को डीज़ल की क़ीमत में वक्फे – वक्फे से मामूली इज़ाफ़ा करने की इजाज़त दी थी, जिस के बाद से ताहाल डीज़ल की क़ीमतों में दो मर्तबा मामूली इज़ाफे़ किए जा चुके हैं। इफरातेज़र (मुदारिसफेति) की शरह में गुज़िश्ता माह 6.62 फ़ीसद की जो तीन साल के दौरान सब से कम रही है।

ताहम डीज़ल और पेट्रोल की क़ीमतों में इज़ाफे के असरात इफ़रातेज़र (मुदारिसफेति) के शरह पर असरअंदाज़ होंगे, जिस की तफ़सीलात आइन्दा महीने दस्तियाब होगी। पेट्रोल की क़ीमत में फ़ी लीटर 1.50 रुपय और डीज़ल की क़ीमत में 45 पैसे फ़ी लीटर का 15 फ़रव‌री को इज़ाफ़ा किया गया था।

इस से पहले 17 जनवरी को डीज़ल की क़ीमत में 50 पैसे फ़ी लीटर का इज़ाफ़ा किया गया था। नमूना रावण मीना ने कहा कि अगरचे बारहवीं मंसूबा (2012-2017) के पहले साल में डीज़ल की क़ीमतों में कमी बेशी के लिए इक़दामात किए गए हैं। इस के इलावा एल पी जी ( पकवान गैस) सब्सीडी की हद मुक़र्रर की गई है, लेकिन इस से तेल कंपनियों को होने वाले ख़सारे की मुकम्मल पा बजाई नहीं हो सकी है।

मीना ने मज़ीद कहा कि तेल कंपनियों के ख़सारों(घाटा) में इज़ाफ़ा हुआ है और उनका माली मौक़िफ़ मुतास्सिर हो रहा है, जिस के नतीजे में बारहवीं मंसूबा के तहत नये प्रोजेक्ट्स के लिए फंड्स मुहय्या करना दुशवार हो रहा है। हुकूमत ने साल 2012_13 के बजट में मुख़तस रक़म के इलावा तेल कंपनियों की सब्सीडी के बिल को 28,500 करोड़ रुपये बढ़ा देने की तजवीज़ को पार्लियामे‍‍‍‍ट से मंज़ूर करवाया था। इस ज़ाइद रकमी तख़सीस से रवां मालियती साल के दौरान तेल पर सब्सीडी के बलज़ 72,260 करोड़ रुपये तक पहुंच गए हैं।

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