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डेंगू बुख़ार से निमटने मज़ीद डॉक्टर्स और नियम तिब्बी अमले की कमेटी

नई दिल्ली: डेंगू बुख़ार के वाक़ियात में नुमायां इज़ाफे के बाद नई दिल्ली के ओहदेदार मंसूबा बंदी कर रहे हैं कि मज़ीद डाँक्टरों और टेक्नीशिनस को हस्पतालों में सूरत-ए-हाल से निमटने के लिए तैनात किया जाएगा। डिसपेंसरीयों के डॉक्टर्स और टेक्नीशियंस और ख़ानगी हस्पतालों का अमला दिल्ली के हस्पतालों में ख़िदमात अंजाम देने के लिए तैयार किया जाएगा ताकि डेंगू के मरीज़ों की ज़बरदस्त ताद से निमटा जा सके।

बाज़ मरीज़ों के अरकाने ख़ानदान ने इल्ज़ाम आइद किया है कि डॉक्टर्स मुनासिब तवज्जे नहीं दे रहे हैं यही बुनियादी वजह है जिसकी वजह से डेंगू का ईलाज कराने लोगों का हुजूम हो गया है।जी डी पंत हॉस्पिटल के एक डाक्टर ने कहा कि डाक्टरों नीम तिब्बी अमला और टेक्नीशनस की तादाद जो दस्तियाब है मरीज़ों की बढ़ती हुई तादाद से निमटने के लिए नाकाफ़ी है।

एक और डाँक्टर ने जिसका ताल्लुक़ लोकनायक हॉस्पिटल से है कहा कि सेहत के मेडिकल कॉलेजस जैसे एम्स आर एम एल लेडी हार्डिंगस और सब्दर जंग ने अपने असातिज़ा को रात की ड्यूटी पर तैनात करना शुरू कर दिया है ताकि मरीज़ों का मुनासिब ईलाज हो सके।

हुकूमत दिल्ली ने मश्वरे जारी किए हैं । पाँच मर्कज़ी मशरिक़ी शुमाली मग़बी और जुनूबी दिल्ली की शाख़ों को मश्वरा दिया गया है कि वो अपने अरकाने अमला की तंज़ीम जदीद करे डेंगू के मरीज़ों की तादाद में इज़ाफ़ा होता जा रहे। सेहत ख़िदमत की डायरेक्टरेट ने तमाम सरकारी और ख़ानदगीहासपटलों को हिदायत दी गई है कि डेंगू बुख़ार के मरीज़ों को दाख़िला देने से इनकार ना किया जाये।

मजलिस बलदी दिल्ली के आदाद-ओ-शुमार के बमूजब डेंगू बुख़ार के 1259मरीज़ों का नई दिल्ली में 5सितंबर तक इंदिराज हो चुका है । डेंगू से सरकारी इत्तेला के बमूजब दो अम्वात वाक़्य हुई हैं और महलोकीन का ताल्लुक़ ज़्यादा-तर शुमाली दिल्ली से है। मजलिस बलदिया ने दीगर तीन अम्वात की इत्तेलाआत को भी सरकारी फ़हरिस्त में शामिल कर लिया है।

महकमा-ए-सेहत के अरकान के अलावा हुकूमत ने ख़ून के बैंक्स को भी हिदायत दी है कि काफ़ी मिक़दार मैं ख़ुद की दस्तयाबी को यक़ीनी बनाया जाये । ख़ानगी ख़ून के बैंकों को भी यही हिदायत दी गई है और मज़ीद कहा गया है कि वो बुरा-ए-नाम शरहों पर ख़ून फ़राहम करें । अवाम से दहशत-ज़दा ना होने की अपील करते हुए बलदी ओहदेदारों ने कहा है कि डेंगू के वाक़ियात का इन्हिसार तशख़ीस की तौसीक़ पर नहीं है।

मरीज़ाओं को इबतिदाई मरहले में दहशत-ज़दा होने की ज़रूरत नहीं है। डेंगू के तमाम मरीज़ों को ख़ून की ज़रूरत नहीं होती। नाक मसूड़ों मुँह जल्द किए के ज़रिए पेशाब या हिजाबत में ख़ून के इख़राज की सूरत में ही डेंगू बुख़ार के मरीज़ाओं को ख़ून की ज़रूरत होती है बसूरत-ए-दीगर उन्हें दहशत-ज़दा नहीं होना चाहिए । दिल्ली के तमाम ह‌स्पतालों बिशमोल सफदरजंग फ़ौजी फ़ौजी अड्डे के आर एन एल लेडी हार्डिंग वग़ैरा में डेंगू बुख़ार के अलावज की सहूलत मौजूद है।

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