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डॉक्टर सुमैया सादिक शहरों को छोड़ गांवों में चिकित्सा उपचार और सामाजिक सेवा देकर बनीं एक मिसाल

बेंगलुरु: शहरों की चकाचौंध और ऐशो आराम की ज़िन्दगी जीने वालों के लिए डाक्टर सुमैया सादिक एक उदाहरण हैं. डॉक्टर सुमैया मेट्रो सिटी में रहकर भी गांवों में ऐसे सामाजिक कार्य कर रही हैं, जिसकी तरफ शायद कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा. चिकित्सा सेवा हों या शिक्षा या रोजगार, हर क्षेत्र में डॉक्टर सुमैया गांव के युवाओं और महिलाओं की सेवा कर रही हैं. पूर्व सांसद प्रिया दत्त और अन्य महत्वपूर्ण हस्तियों ने भी डाक्टर सुमैया की सामाजिक सेवाओं की सराहना की है.

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने के लिए डॉक्टर सुमैया को कई पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चूका है. डाक्टर सुमैया का संबंध बेंगलुरु के एक शिक्षित और खुश हाल घराने से है. एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद डॉक्टर सुमैया ने ऑस्ट्रेलिया और इंडोनीशिया में फंक्शनल मेडिसिन की उच्च शिक्षा प्राप्त की. बेंगलुरु लौटने के बाद स्किन से जुड़ी बीमारियों के क्लिनिक की स्थापना की.
एक दिन डॉक्टर सुमैया को गांवों से आए मरीजों ने सलाह दी कि वे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कुछ काम करें. बस क्या था, डॉक्टर सुमैया गांवों के लिए निकल पड़ी और वहां जाकर स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने लगीं.
एक गांव में जब महिलाओं ने कहा कि उन्हें स्वास्थ्य शिविर की नहीं, बल्कि शिक्षा और रोजगार की जरूरत है, तो सुमैया ने सामाजिक सेवाओं का सिलसिला शुरू किया. गांवों की दर्द और परेशानियों से घिरी जीवन को देखते हुए डॉ सुमैया ने मित्रा यानी हमारा दोस्त नामक सामाजिक संस्था की स्थापना की. इस संस्था के तहत बलगाम और धारवाड जिलों में बिजली से वंचित चार गांव में सोलर ग्रेड स्थापित किए गए हैं. बेरोजगार युवाओं के लिए मोबाईल रिपेयर यूनट, महिलाओं के लिए सिलाई क्लासेस, छात्रों के लए टयूशन कक्षाएं आदि कई कार्य किए जा रहे हैं. डाक्टर सुमैया ने शहरों की चकाचौंध में रहने वाले लोगों से अपने गांव को ना भूलने की अपील भी की.

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