डोनल्ड ट्रंप ने तुर्की को क्यों दी तबाह करने की धमकी?

डोनल्ड ट्रंप ने तुर्की को क्यों दी तबाह करने की धमकी?

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने तुर्की को धमकाते हुए कहा है कि यदि सीरिया से अमरीकी बलों के वापस लौटने के बाद तुर्की ने कुर्द बलों पर हमले किए तो अमरीका तुर्की को आर्थिक तौर पर तबाह कर देगा.

रविवार को किए दो ट्वीट में ट्रंप ने ये भी कहा कि वो नहीं चाहते कि कुर्द ऐसा कुछ करें जिससे तुर्की भड़क जाए.

वहीं तुर्की ने अमरीकी धमकी को ख़ारिज कर दिया है. तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावासोगलू ने कहा, “तुर्की को आर्थिक तौर पर धमकी देकर आप कहीं नहीं पहुंचेंगे.”

उत्तरी सीरिया में कथित इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लडाई में अमरीकी बल कुर्द लड़ाकों के साथ मिलकर लड़ते रहे हैं.

वहीं, तुर्की कुर्द समूह पीकेके और वाईपीजी (पीपुल्ज़ प्रोटेक्शन यूनिट) को आतंकवादी संगठन मानता है.

तुर्क राष्ट्रपति रैचेप तैयप अर्दोआन अमरीका के कुर्द बलों को समर्थन देने पर ग़ुस्से का इज़हार करते रहे हैं और अपने भाषणों में इस समूह को तबाह करने की धमकी देते रहे हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप के रविवार को दिए गए बयान के बाद उनकी सीरिया से अमरीकी बलों को बापस बुलाने की नीति की और कठोर आलोचना हो रही है.

सऊदी अरब के शाही परिवार के वरिष्ठ सदस्य प्रिंस तुर्की-अल-फ़ैसल ने बीबीसी से कहा कि इससे क्षेत्र में नकारात्मक असर होगा जिसका फ़ायदा ईरान, रूस और सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद को होगा.

इस बीच, मध्य पूर्व दौरे पर आए अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो सऊदी अरब में हैं. वो मध्य पूर्व में अमरीकी सहयोगी देशों में भरोसा मज़बूत करने के उद्देश्य से इस यात्रा पर आए हैं.

राष्ट्रपति ट्रंप ने बीस किलोमीटर चौड़ा बफ़र ज़ोन बनाने का ज़िक्र भी किया. पोम्पियो ने सऊदी अरब में कहा कि अमरीका सीरिया में एक सुरक्षित ज़ोन स्थापित करना चाहता है ताकि तुर्की और कुर्दों के बीच संघर्ष को रोका जा सके.

कावासोगलू ने कहा कि, ‘तुर्की सुरक्षित ज़ोन के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन हम ऐसे आतंकवादी संगठन पर हमला कर रहे हैं जो सीरिया को बांटने की कोशिश कर रहा है.’

ट्रंप ने क्या कहा?

राष्ट्रपति ट्रंप ने सीरिया से अमरीकी सैन्यबलों को वापस बुलाने के अपने फ़ैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि कथित इस्लामिक स्टेट के जो लड़ाके रह गए हैं उनसे हवाई हमलों से निबटा जा सकता है.

हालांकि ट्रंप ने ये नहीं कहा कि अगर तुर्की वाईपीजी के लड़ाकों पर हमला करता है तो वो तुर्की की अर्थव्यवस्था पर कैसे चोट करेंगे.

राष्ट्रपति ट्रंप ने ये भी कहा कि सीरिया में अमरीकी कार्रवाई से सबसे ज़्यादा फ़ायदा ईरान, सऊदी अरब और सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद को हुआ है और अब अमरीकी बलों के घर लौटने का वक़्त आ गया है.

इसी बीच राष्ट्रपति अर्दोआन के प्रवक्ता इब्राहिम कालिन ने एक ट्वीट में कहा है कि तुर्की को उम्मीद है कि अमरीका अपनी रणनीतिक साझेदारी का सम्मान करेगा.

उन्होंने कहा, “आतंकवादी आपके दोस्त या गठबंधन के सहयोगी नहीं हो सकते हैं.”

क्या ट्रंप तुर्की को चोट पहुंचा सकते हैं?

ट्रंप की धमकी को दरकिनार करते हुए कावासोगलू ने कहा है, “हम ये बात कई बार कह चुके हैं कि हम न किसी धमकी से डरेंगे ना डिगेंगे.”

ट्रंप के तरीके की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, “रणनीतिक गठबंधनों पर ट्विटर या सोशल मीडिया पर चर्चा नहीं करनी चाहिए.”

हालांकि इससे पहले अमरीकी प्रतिबंधों का तुर्की की अर्थव्यवस्था पर असर हुआ है.

अमरीका ने अगस्त में एक अमरीकी पादरी की गिरफ़्तारी से पैदा हुए विवाद के दौरान तुर्की पर प्रतिबंध और व्यापारिक कर लगाए थे जिससे तुर्की की मुद्रा लीरा में भारी गिरावट आई थी. पादरी एंड्रयू ब्रनसन को अक्तूबर में रिहा कर दिया गया था.

ट्रंप की आलोचना

डोनल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों को चौंकाते हुए बीते महीने सीरिया से अमरीकी बलों को वापस बुलाने का फ़ैसला लिया था. इसकी घरेलू स्तर पर भी आलोचना हुई है.

सीरिया के क़रीब तीस फ़ीसदी हिस्से पर वाईपीजी के नेतृत्व वाले गठबंधन सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ का नियंत्रण है. अमरीका इस गठबंधन की मदद कर रहा था.

अमरीका ने बीते सप्ताह अपने बलों को सीरिया से वापस बुलाना शुरू कर दिया है. सैन्य साजो-सामान वापस लौटाया जा रहा है. हालांकि अभी भी अमरीकी सैनिका सीरया में मौजूद हैं.

इसी सप्ताहांत माइक पोम्पियो ने कहा था कि उन्होंने फ़ोन पर तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावासोगलू से बात की है और उन्हें उम्मीद है कि कुर्द लड़ाकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुर्की के साथ समझौता हो जाएगा. हालांकि इस बारे में उन्हें विवरण नहीं दिया था.

अबु धाबी में बोलते हुए पोम्पियो ने कहा था कि अमरीका तुर्की के अपने लोगों और अपने क्षेत्र को आतंकवादियों से सुरक्षित रखने के अधिकार का सम्मान करता है.

इसके आगे जोड़ते हुए उन्होंने कहा था, “हम ये भी जानते हैं कि जो इतने सालों से हमारे साथ मिलकर लड़ रहे थे वो भी सुरक्षा के हक़दार हैं.”

रियाद में वार्ता के दौरान विदेश मंत्री सीरिया के अलावा यमन युद्ध पर भी चर्चा कर सकते हैं. अमरीकी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक वो पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या के मामले के बारे में जानकारियां भी ले सकते हैं.

सऊदी शाही परिवार के आलोचक जमाल ख़ाशोज्जी की इस्तांबुल में सऊदी दूतावास के भीतर हत्या कर दी गई थी.

सीरिया में कितने अमरीकी सैनिक हैं?

रिपोर्टों के मुताबिक क़रीब दो हज़ार अमरीकी सैनिक सीरिया में तैनात हैं. अमरीकी सैनिक सबसे पहले 2015 में सीरिया पहुंचे थे.

तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वाईपीजी लड़ाकों को प्रशिक्षित करने के लिए विशेष अमरीकी सैन्य बलों को सीरिया भेजा था.

सीरियाई अरब समूहों और विद्रोही गुटों को प्रशिक्षित करने के कई प्रयास नाकाम होने के बाद अमरीका ने कुर्द बलों को सहयोग दिया था. सीरिया में इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ाई में कुर्द बल बेहद असरदार रहे और एक बड़े हिस्से से इस्लामिक स्टेट का सफ़ाया करने में कामयाब रहे.

बीते सालों में सीरिया में अमरीकी बलों की संख्या बढ़ती रही और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में अमरीकी अड्डे और हवाई क्षेत्र स्थापित किए गए.

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