Tuesday , December 12 2017

तंख्वाह बढ़ाने की जल्दी, आवाम के सवालों पर बेचैनी नहीं

झारखंड के एमएलए के तंख्वाह बढ़ाने की तैयारी है। रियासत के ज्यादातर एमएलए इस पर मुंफिक हैं। स्पीकर शशांक शेखर भोक्ता के साथ बैठक कर तय किया है कि तजवीज हुकूमत को भेजा जायेगा। गुजिशता दिनों स्पीकर बिहार के दौरे पर गये और तंख्वाह मे

झारखंड के एमएलए के तंख्वाह बढ़ाने की तैयारी है। रियासत के ज्यादातर एमएलए इस पर मुंफिक हैं। स्पीकर शशांक शेखर भोक्ता के साथ बैठक कर तय किया है कि तजवीज हुकूमत को भेजा जायेगा। गुजिशता दिनों स्पीकर बिहार के दौरे पर गये और तंख्वाह में फर्क पाया।

बिहार के बराबर तंख्वाह इजाफा की तैयारी झटपट हो गयी। तंख्वाह बढ़ाने की जल्दबाजी है। वहीं एवान के अंदर उठने वाले सवालों का हल नहीं निकलता। एसेम्बली में गुजिशता सालों में 32 सौ से मजीद यकीन दिहानी जेरे समाअत हैं। अहम मौजूआत पर स्पीकर का रेगुलेटरी एवान के अंदर आता है। स्पीकर के रेगुलेटरी पर भी हुकूमत का टालमटोल का रवैया होता है। बदउनवान से लेकर अकसरियत पसंद के मुद्दे पर एवान में बहस होती है। एसेम्बली से इस पर कोई सख्त पॉलिसी बने, हुकूमत पहल नहीं कर पाती है। गरीबों के इंदिरा आवास का मामला हो, पीडीएस सिस्टम दुरुस्त करने का मामला हो या फिर शहर और गांवों में बिजली-पानी की मसायल हो, तय मुद्दत में काम नहीं होता। आवाम की बुनियादी सहूलतों को लेकर भी तैयारी नज़र नहीं आती।

एसेम्बली से मुतनाज़ा और बड़े मामले का भी हल नहीं निकलता। बहस खूब होती है, लेकिन पॉलिसी बनाने के रास्ते पर नहीं बढ़ पाते। मुक़ामी बाशिंदों का मुद्दा हर बार उठता रहा है, लेकिन हुकूमत अपनी मंसूबा बंदी पॉलिसी नहीं बना सकी। नक़ल मकानी और और दुबारा बसाने के मुद्दे पर रियासत को एतमाद में लेने का रास्ता एसेम्बली से नहीं निकला।

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