Tuesday , September 25 2018

तक़सीम विरासत एक अहम दीनी फ़रीज़ा ,लड़कीयों को महरूम ना करने पर ज़ोर

बीदर 25 जून: आदमी अपनी जिस मिल्कियत को मौत के बाद अपने पीछे छोड़ जाये इसे छोड़े हुए माल को विरासत कहेंगे। विरासत में लड़के को दो हिस्से, लड़की को एक हिस्सा, वालदैन अगर ज़िंदा हूँ तो उनका 6 वां हिस्सा, जबकि दुसरे रिश्तेदारों में भी विरा

बीदर 25 जून: आदमी अपनी जिस मिल्कियत को मौत के बाद अपने पीछे छोड़ जाये इसे छोड़े हुए माल को विरासत कहेंगे। विरासत में लड़के को दो हिस्से, लड़की को एक हिस्सा, वालदैन अगर ज़िंदा हूँ तो उनका 6 वां हिस्सा, जबकि दुसरे रिश्तेदारों में भी विरासत की तक़सीम-ए-अमल में आएगी।

मौलाना यूनुस किरमानी सदर मजलिस अलालमाए तहरीक इस्लामी शाख़ बीदर ने मुग़ल गार्डन बीदर में जमात-ए-इस्लामी हिंद शाख़ बीदर के ज़ेर-ए‍एहतेमाम मुनाक़िदा मीटिंग विरासत, वसीयत, हेब्बा और मुतबन्ना के ज़ेर-ए-उनवान ख़िताब कररहे थे। मौसूफ़ ने इज़हार-ए-अफ़सोस करते हुए कहा कि मुस्लिम मुआशरे बहनों के हिस्से का ख़्याल नहीं करता जबकि बाप अपनी ज़िंदगी में एक करोड़ रुपये भी अपनी बेटी पर ख़र्च करता है तो भी इस का हवाला विरासत की तक़सीम के मौके पर दे कर बहन को इस के हिस्से से महरूम नहीं किया जा सकता।

बहनों को तरका फ़राइज़ से मुताल्लिक़ है।अगर नमाज़ और रोज़ा ना रखा जाये तो उन्हें अल्लाह माफ़ करसकता है, लेकिन जो अहकामात बहनों, पड़ोसीयों या दुसरें अफ़राद से मुताल्लिक़ हैं , वो जब तक माफ़ नहीं करेंगे, अल्लाह उन्हें माफ़ नहीं करेगा।

एक हदीस में ये बात हैके शहीद के वो गुनाह माफ़ नहीं होते जो बंदों से मुताल्लिक़ हैं, वसीयत के बारे में उन्होंने कहा कि मरने वाले की वसीयत मुक़द्दम हुआ करती है, छोड़े हुए माल के तीनों हिस्सों से एक हिस्से के ज़रीये मरहूम की वसीयत को पूरा किया जाएगा।

अपनी ख़ुशी-ओ-रजामंदी से किस को कोई ममलूका चीज़ देना हेब्बा कहलाता है। उसकी तरग़ीब इस्लाम में है। हज़ोर ने फ़रमाया तहाइफ़ देने से मुहब्बत बाक़ी रहती है।

सहाबा किराम हुज़ूर अकरम(PBUH) को और ख़ुद आपस में एक दूसरे को तहाइफ़ से नवाज़ते और हुज़ूर अकऱ् मुइ भी तहाइफ़ देने में मशहूर थे।

मुकम्मिल माल हक़ीक़ी बेटे को मिलेगा, पाले हुए या गोद लिए हुए बेटे को वो मुक़ाम नहीं मिलेगा और नसब इस के साथ रहेगा जिस का वो हक़ीक़ी बेटा। बेटी है।

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