Wednesday , December 13 2017

तनख़्वाह याफ़ता मुलाज़मीन इनकम टैक्स में इज़ाफ़ा

बैंगलौर फरवरी : आसूचाम के एक सर्वे में कहा गया है कि सनअत-ओ-तिजारत के मुख़्तलिफ़ शोबों से वाबस्ता तनख़्वाह याफ़ता मुलाज़मीन की बडी तादाद चाहती है कि वज़ीर फिनानस पी चिदम़्बरम अपने आइन्दा बजट में कम से कम तीन लाख रुपय की हद तक टेक्स‌ दें। नीज़ तिब्बी-ओ-तालीमी एलाउनसेस से मिनहाई में इज़ाफ़ा किया जाये।

इस सनअती इदारा ने कहा है कि बजट 2013 वज़ीर फिनानस से आम आदमी की तवक़्क़ुआत के मौज़ू पर दिल्ली, मुंबई , कोलकता , चेन्नाई , बैंगलौर , अहमदाबाद , हैदराबाद, पुने जैसे कई शहरों में सर्वे किया है । जिस में 89 फ़ीसद जवाब दहिंदगान ने कहा है कि टैक्स से पाक आमदनी की हद दरअसल इफ़रात-ए-ज़र की हक़ीक़ी सतह से हम आहंग नहीं है ।

दो लाख रुपय सालाना आमदनी की हद असतसनी को कम से कम तीन लाख रुपय तक बढ़ाया जाना चाहीए । बल्कि ख़वातीन को 3.5 लाख रुपय सालाना आमदनी की हद तक इनकम टैक्स से असतसनी दिया जाना चाहीए जिस से इन्फ़िरादी क़ुव्वत खरीद में इज़ाफ़ा होगा और तलब को तक़वियत पहूंचेगी ।

बढ़ते हुए तिब्बी मसारिफ़ के पेश नज़र मौजूदा टैक्स से आज़ाद हद 15000 रुपय को 50,000 रुपय तक बढ़ा दिया जाना चाहीए । आजिर की जानिब से मुलाज़मीन को दीए जाने वाले ट्रांसपोर्ट एलाउनस को भी 800 रुपय माहाना की हद तक टैक्स से मसतसनी किया गया है ।

ये हद 10 साल क़बल मुक़र्रर की गई थी जिस पर नज़रसानी के साथ 3000 हज़ार रुपय माहाना तक इज़ाफ़ा की ज़रूरत है कियो की इस मुद्दत के दौरान मसारिफ़ में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हुआ है। रास्त मुहासिल ज़ाबता पर पार्लियामानी मजलिस क़ायमा ने भी इनकम टैक्स की हद में इज़ाफ़ा की तजवीज़ पेश की है।

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