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तमाम मुलाज़मतों केलिए अक़ल्ल तरीन उजरतों के ताय्युन की तजवीज़

नई दिल्ली । 15 मार्च (पी टी आई) हुकूमत ने तमाम इक़साम की मुलाज़मतों केलिए क़ौमी सतह पर अक़ल्ल तरीन उजरतों का ताय्युन करने की तजवीज़ पेश की है। इन उजरतों पर सारिफ़ीन के मसारिफ़ पर एन एस एस ओ सर्वे की बुनियाद पर हर पाँच साल में एक मर्तबा नज़रसानी

नई दिल्ली । 15 मार्च (पी टी आई) हुकूमत ने तमाम इक़साम की मुलाज़मतों केलिए क़ौमी सतह पर अक़ल्ल तरीन उजरतों का ताय्युन करने की तजवीज़ पेश की है। इन उजरतों पर सारिफ़ीन के मसारिफ़ पर एन एस एस ओ सर्वे की बुनियाद पर हर पाँच साल में एक मर्तबा नज़रसानी की जाएगी।

वज़ीर मेहनत मल्लिकार्जुन खरगे ने मुनज़्ज़म-ओ-ग़ैर मुनज़्ज़म शोबों के मेहनतकशों और ट्रेड यूनियनों की हालिया मुल्क गीर हड़ताल पर राज्य सभा में तहरीक तवज्जु दहानी का जवाब देते हुए ये एलान किया और कहा कि मर्कज़ी हुकूमत ने बुनियादी सतह पर क़ौमी अक़ल्ल तरीन उजरतों (एन एफ़ एल एम डब्लयू) के ताय्युन केलिए 22 फरवरी को तरमीमी मंज़ूरी दी है और मुनासिब-ए-वक़्त पर पार्लीमेंट में एक बिल पेश की जाएगी।

उन्होंने कहा कि पेरोल पर मौजूद कोंटर‌एक्ट वर्कर्स की उजरतों में यकसानियत पैदा करने की ग़रज़ से एक तजवीज़ पर हुकूमत सरगर्मी से ग़ौर करहि है। अक़ल्ल तरीन उजरत क़ानून में तरमीम पर मिस्टर खरगे ने इस क़ानून की मौजूदा दफ़आत का किसी भी रियासत में उसे रोज़गार केलिए इतलाक़ नहीं होता जहां वर्करों की तादाद एक हज़ार से कम है।

ताहम तरमीम के बाद ये क़ानून सब केलिए यकसाँ तौर पर लागू होगा। एन एफ़ एल एम डब्लयू पर एन एस एस ओ मसारिफ़ सारिफ़ीन की बुनियाद पर हर पाँच साल में एक मर्तबा नज़रसानी की जाएगी। एन एफ़ एल एम डब्लयू को क़ानूनी बताया जाएगा और ये तमाम रोज़गारों पर लागू होगा।

कौंटर‌एक्ट लेबरस को बाक़ायदा बनाने के मसले पर उन्होंने कहा कि कौँटर‌एक्ट लेबर (बाक़ायदगी-ओ-बर्ख़ास्तगी) क़ानून 1970 में तरमीम केलिए मुसव्वदा तैय्यार किया जा रहा है, जिस पर हुकूमत सरगर्मी से ग़ौर कररही है। उन्होंने कहा कि लेबर क़वानीन पर मुम्किना अमलावरी के तमाम ज़रूरी इक़दामात करने के अह्द के पाबंद है।

मिस्टर मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि आधार कार्ड्स की बुनियाद पर अक़ल्ल तरीन उजरतों के क़ानून के तहत तमाम मुलाज़मीन को शनाख़ती कार्ड्स फ़राहम किए जाऐंगे। मिस्टर खरगे ने मज़ीद कहा कि ई पी ए के तहत तमाम फ़िलहाल 500 रुपय माहाना या इस से कम वज़ीफ़ा पाने वालों को कम से कम एक हज़ार रुपय माहाना वज़ीफ़ा देने की तजवीज़ हुकूमत के ज़ेर-ए-ग़ौर है। इस मक़सद केलिए हुकूमत के हिस्से को 27 फ़ीसद तक बढ़ा दिया जाएगा।

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