Wednesday , September 19 2018

तरक़्क़ी का बिहार मॉडल ही चलेगा

वजीरे आला नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार के तरक़्क़ी की कहानी बिहार में ही लिखी गयी है, जिसकी बहस मुल्क-दुनिया में हो रही है। बिहार का रास्ता इंसाफ के साथ तरक़्क़ी का है, जामा तरक़्क़ी की है।

वजीरे आला नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार के तरक़्क़ी की कहानी बिहार में ही लिखी गयी है, जिसकी बहस मुल्क-दुनिया में हो रही है। बिहार का रास्ता इंसाफ के साथ तरक़्क़ी का है, जामा तरक़्क़ी की है।

हमारी पॉलिसी इंसानी तरक़्क़ी इंडेक्स की बुनियाद पर तरक़्क़ी करने की है, सबों को साथ लेकर चलने की है, ताकि तमाम ज़ात-मजहब के लोगों की तरक़्क़ी हो। सबको साथ लेकर चलने से ही तरक़्क़ी होगा। इसके अलावा तरक़्क़ी का कोई और मॉडल नहीं हो सकता। इतवार को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में जदयू की स्टूडेंट यूनिट क़याम के तकरीब में वजीरे आला ने कहा कि हमें खुसूसी रियासत का दर्जा चाहिए। महेरिन की कमेटी मरकजी हुकूमत को अपनी सिफारिश सौंपेगी।

मरकज़ हुकूमत बिहार को खुसूसी रियासत का दर्जा दे। दर्जा मिला, तो खैर मख्दम देंगे, वरना अपने तहरीक को और तेज करेंगे। यह बिहार के हक की लड़ाई है। हमने खुसूसी दर्जे के लिए तविल जद्दो जहद किया है। सवा करोड़ लोगों के सिग्नेचर जुटाये गये। पटना से लेकर दिल्ली तक रैली की गयी।

इसी जद्दो-जहद की वजह दिल्ली की हुकूमत को हरकत में आना पड़ा है। हम भीख नहीं मांग रहे हैं। हमें भी आगे बढ़ने का हक़ है। बिहार की नौजवान नसल आगे बढ़ने के लिए बेचैन है। अगर पॉलिसी साज पहल होती है, तो बिहार समेत दीगर पसमानदा रियासतों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

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