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तलबा को बैरूनी यूनीवर्सिटीज़ की तालीम तक रसाई के लिए जल्द क़ानून साज़ी

मुमलिकती वज़ीर फ़रोग़-ए-इंसानी वसाइल डाक्टर डी पुरनदेशवरी (Dr.

मुमलिकती वज़ीर फ़रोग़-ए-इंसानी वसाइल डाक्टर डी पुरनदेशवरी (Dr. D Purandeswari)ने आज कहा कि मर्कज़ी हुकूमत पार्लीमैंट में बहुत जल्द बैरूनी तालीम फ़राहम कुनुन्दगान ( ज़ाबता ) बिल पेश करेगी, इस बिल का एक तवील अर्सा से इंतिज़ार किया जा रहा है जिस का मक़सद हिंदूस्तानी तलबा को समुंद्र पार यूनीवर्सिटीज़ की जानिब से फ़राहम की जाने वाली तालीम तक रसाई के काबिल बनाना है।

श्रीमती पुरनदेशवरी ने एडीटर्स कान्फ्रेंस के दूसरे दिन आज यहां अख़बारी नुमाइंदों से बातचीत करते हुए कहा कि ये बिल तक़रीबन तैयार किया जा चुका है और राय लेने के मक़सद से वज़ारत-ए-क़ानून से रुजू किया गया है जिस के बाद इस बिल को बहुत जल्द पार्लीमैंट में पेश कर दिया जाय। उन्होंने कहा कि ये बिल ए आई सी टी ई ज़ाबतों के पाबंद इदारों को बैरूनी तालीमी इदारों से उल-हाक़ की इजाज़त पर अमल करेगा ताकि तलबा को तालीम के लिए बैरूनी मुल्क रवाना करने के बहाने उन के गै़रक़ानूनी इस्तिहसाल करने वालों की हौसलाशिकनी की जा सके, और ऐसी सरगर्मीयों को रोका जा सके।

तालीमी शोबा पर मसारिफ़ में इज़ाफ़ा करने के लिए रियास्ती हुकूमतों पर ज़ोर देते हुए श्रीमती पुरनदेशवरी ने कहा कि मर्कज़ी हुकूमत का निशाना है कि मजमूई क़ौमी पैदावार ( जी डी पी) का 6% हिस्सा तालीमी शोबा के लिए मुख़तस किया जाए। उन्हों ने कहा कि फ़िलहाल मलिक के जी डी पी का.78 फ़ीसद हिस्सा तालीमी शोबा के मसारिफ़ से निमटने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

तालीम दरअसल मर्कज़ और रियास्तों दोनों ही की मुशतर्का ज़िम्मेदारी है और हमें इस शोबा में मुशतर्का तौर पर काम करने की ज़रूरत है। उन्हों ने कहा कि तालीमी शोबा में इस्लाहात को यक़ीनी बनाने के मक़सद से कम-ओ-बेश 14 बिल्स पार्लीमैंट में ज़ेर तसफ़ीया हैं क्योंकि अपोज़ीशन ने( लोक पाल बिल पर) ऐवान की कार्रवाई को रोक दिया है।

श्रीमती पुरनदेशवरी ने कहा कि कानून-ए-हक़ तालीम 2013 से नाफ़िज़ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वज़ारत-ए-फ़रोग़ इंसानी वसाइल ने एक क़ौमी एक्रेडेशन बिल तैयार करने का मंसूबा बनाया है जिस का मक़सद तमाम तालीमी इदारा जात को मयारी इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल का पाबंद बनाना है।श्रीमती पुरनदेशवरी ने कहा कि ग्लोबलाइज़ेशन के पेशे नज़र हिंदूस्तान के लिए अब वक़्त आ गया है कि वो अपनी तालीमी पालिसी पर दुबारा नज़र डाले और तालीमी शोबा में प्रोग्रामों को मज़ीद मुस्तहकम बनाया जाए।

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