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तलाक़ की घटनाओं की रोक-थाम के लिए मुफ़्त कौंसलिंग के बेहतर नतीजे, सदर क़ाज़ी शरीयत पनाह बलदा

हैदराबाद: शहर हैदराबाद में तलाक़ की घटनाओं में इज़ाफ़ा हो गया है। इसके कई कारण हैं। बाज़ मामलों में छोटे घटनाओं की बिना पर तलाक़ और खुला के घटना पेश आरही हैं। ऐसे घटनाओं पर रोक लगाने के लिए शरीयत पनाह बलदा (दफ़्तर कज़ा शाह अली बंडा) ने एक विशेष अभियान शुरू किया है। ऐसे लोग‌ जो तलाक़ के इच्छुक हैं,उन्हें अपने निर्णय को संशोधित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

दूसरी तरफ़ खुला की इच्छुक लड़कीयों की मुफ़्त कौंसलिंग की जा रही है। पिछले महीने 11सितंम्बर से कौंसलिंग शुरू गई थी। जिसकी विभिन्न कोनों से प्रशंसा की जा रही है और पिछले एक महीने के दौरान 41 लड़कीयां शरीयत पनाह बलदा से खुला के लिए सामने आई जिनकी मुफ़्त कौंसलिंग की गई जिनमें कुछ‌ लड़कीयां अपने फ़ैसले पर वापस सोचने का फ़ैसला किया और ख़ुश अज़ाद ज़िंदगी गुज़ारना चाहा। इस तरह कई जोड़े अलग होने से बच गए।

सदर क़ाज़ी शरीयत पनाह बलदा का ये अभियान न केवल सराहनीय है बल्कि अनुकरणीय है बल्कि क़ाबिल है ।ज़रूरत इस बात की है कि अन्य‌ क़ाज़ीयां भी इस की मुहिम का हिस्सा बनें और एसे घटनाओं पर रोक लगाया जा सके। दफ़्तर कज़ा शरीयत पनाह बलदा में खुला के लिए आने वालों की कौंसलिंग करते हुए उनको खुला से रोकने की कामयाबी के साथ प्रोत्साहित किया जाता है। ये कौंसलिंग बिलकुल मुफ़्त दी जा रही है जिसके शानदार नतीजे निकल रहे हैं।

इस में सदर क़ाज़ी शरीयत पनाह बलदा-सदर अंजुमन कज़ा तेलंगाना मौलाना क़ाज़ी मीर क़ादिर अली ख़ान साजिद नवाब ने तफ़सील बताते हुए कहा कि विभिन्न दिशाओं से इस क़दम की प्रशंसा की जा रही है। उन्होंने कहा कि अलगाव के इच्छुक जोड़ों को कौंसलिंग के ज़रिए मिला देना भी एक नेकी का काम है और ऐसे पहल से सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब तक ऐसे 41 जोड़ों की कौंसलिंग की गई और बाज़ अपनी ग़लती पर शर्मिंदा हो गए और फिर नए तरीखे से ज़िंदगी गुज़ारने के लिए राज़ी हो गए।

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